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A Palavra de Deus

Por Bíblia Online

A Palavra de Deus é viva, eficaz e eterna. Desde 'No princípio era o Verbo' até 'O céu e a terra passarão, mas as minhas palavras não hão de passar', ela é a revelação suprema do Criador.

No princípio era o Verbo

A Palavra é Deus encarnado. No princípio era o Verbo, o Verbo estava com Deus, e o Verbo era Deus. Todas as coisas foram feitas por Ele.

अनि वचन हधरण

आदि ें वचन ा, और वचन परम्‍वर ा, और वचन परम्‍वर ा।

अनि वचन हधरण

आदि ें वचन ा, और वचन परम्‍वर ा, और वचन परम्‍वर ा।

वचन हधऔर हमें िा। हमनउसकऐसमहिी, िएकलमहिा। वह अनरह और सच्‍परिा।

वचन हधऔर हमें िा। हमनउसकऐसमहिी, िएकलमहिा। वह अनरह और सच्‍परिा।

तब परम्‍वर कहा, "उजिो," और उजिगया।

वह उसकमहिरकऔर उसकततरतिै, और अपनमरवचन वह सब वसरखतै। वह हमों कर पर महमहििओर ा।

ि्‍हम समझतैं ि परम्‍वर वचन ्‍ि रचनऐसि वसिैं उनसरचगईिनहीं ीं।

आकशमडल रचनयहवचन े,

और उसकगणों रचनउसुँ्‍ै।

A Palavra é viva e eficaz

A Palavra de Deus é mais cortante que espada de dois gumes. Ela julga pensamentos e intenções do coração, transforma e liberta.

परम्‍वर वचन ि, रभवशऔर ितलवअधिै, और आता, ों और मज्‍आर-पदकर अलग करतै, और मन िों और अभिों परखतै।

परम्‍वर वचन ि, रभवशऔर ितलवअधिै, और आता, ों और मज्‍आर-पदकर अलग करतै, और मन िों और अभिों परखतै।

और उद और आततलव, परम्‍वर वचन ै, ो।

Toda Escritura é inspirada

Toda a Escritura é inspirada por Deus e útil para ensino, correção e instrução na justiça. Ela é perfeita e imutável.

पविरश्‍परम्‍वर रण रचगयऔर िे, ड़ने, रनऔर िकतििभदयक ै,

पविरश्‍परम्‍वर रण रचगयऔर िे, ड़ने, रनऔर िकतििभदयक ै, िससपरम्‍वर जन िबने, और हर भलिसकषम

पविरश्‍परम्‍वर रण रचगयऔर िे, ड़ने, रनऔर िकतििभदयक ै, िससपरम्‍वर जन िबने, और हर भलिसकषम

Luz para o caminho

A Palavra é lâmpada para os pés e luz para nosso caminho. Ela ilumina, orienta e protege o que nela medita dia e noite.

वचन ों िपक,

और पथ िउजिै।

वचन ों िपक,

और पथ िउजिै।

वचनों लनरकिलतै,

िसससमझ ्‍करतैं।

यहा, वचन आकें सदतक िै।

जवअपनरखे?

वचन लन करके।

ैंवचन अपनदय ें रख

ि िकरूँ।

वचन सतै,

और हर एक धरममय ियम सदतक अटल ै।

Obedecer a Palavra

Seja praticante da Palavra e não apenas ouvinte. Jesus disse que quem ouve e pratica é como o homem sábio que edificou sobre a rocha.

वचन लन करनबनऔर वल नननहीं वयैं।

वचन लन करनबनऔर वल नननहीं वयैं।

वचन लन करनबनऔर वल नननहीं वयैं। ोंि यदि वचन ननपरउसकलन करे, वह उस मनसमअपनिहरदरपण ें खतै; वह वयखकर चलऔर ि वह ा।

इसलिमलिनतऔर समसड़कर उस वचन नमरतरहण कर ममें गयऔर ों बचसकतै।

िऔर मन

"इसलिइन वचनों नतऔर उनकलन करतै, वह उस ियक्‍ि समै, िसनअपनघर चटपर बना।

इस पर कहा,"ि:

मनवल नहीं,

परपरम्‍वर

ुँिकलनहर एक वचन

िरहा।"

इस पर कहा,"ि:

मनवल नहीं,

परपरम्‍वर

ुँिकलनहर एक वचन

िरहा।"

उसनकहा,"ाँ, बलि अधिधनैं परम्‍वर वचन नतऔर उसकलन करतैं।"

उसउततर िा,"ि: मनवल िनहीं रहा।"

इस पर सब अचि, और आपस ें यह करनलगे, "यह वचन ै? वह अधिऔर मरअशआतआजऔर िकल ैं।"

A Palavra que permanece

Céus e terra passarão, mas as palavras de Jesus jamais passarão. A Palavra do Senhor permanece para sempre — eterna e infalível.

आकऔर टल े, परवचन कदि टलेंे।

आकऔर टल े, परवचन कभटलेंे।

यहवचन खरै,

और उसकसब सच्‍ै।

यहवचन खरै,

और उसकसब सच्‍ै।

परम्‍वर एक-एक वचन ै;

परम्‍वर शरण ैं

उनकिवह ठहरै।

ोंि ि यहै;

उसुँऔर समझ ें िकलतैं।

ोंि ि यहै;

उसुँऔर समझ ें िकलतैं।

O poder da Palavra

A Palavra transforma, sara e liberta. Quem permanece na Palavra de Jesus conhece a verdade, e a verdade o liberta.

तब उन यहिों िोंउस पर ि्‍िा, कहा,"यदि वचन ें बनरहसचमिठहरे,

तब उन यहिों िोंउस पर ि्‍िा, कहा,"यदि वचन ें बनरहसचमिठहरे, और सतऔर सतें वतकरा।"

ैं मससच-सच कहतूँ ि यदि वचन लन करवह अनतक नहीं ा।"

वन और

"ैं मससच-सच कहतूँ ि वचन नतऔर जनपर ि्‍करतै, अनवन उसकै, और उस पर आजनहीं ी, बलि वह ें िकलकर वन ें रवकर ै।

इस पर उससकहा,"यदि झसरखतवह वचन लन करा, और िउससरखा, और हम उसकआएऔर उसककरेंे।

अब उस वचन रण ैंमसकहै, ो।

सतउनें पविकर; वचन सतै।

अतजब वह तकों ें उठउसकिों मरण आयि उसनयह कहा, और उनोंपविरश्‍और उस वचन पर कहा, ि्‍िा।

उसकवचन रण और बहों ि्‍िा।

पर ि्‍करतै, पविरश्‍कहतै,

उसकदय ें वन जल नदिाँ बह िकलेंी।"

Meditar na Palavra

A meditação na Palavra traz prosperidade e bom sucesso. Ela é fonte de sabedoria, consolo e orientação para toda a vida.

यदि अपनुँकरि रभै, और अपनमन ें ि्‍करि परम्‍वर उसतकों ें िा, उदएगा; ोंि मन ि्‍करनपरििकतै, और ुँकरनपरिउदै।

ैंउसपरम्‍वर पर भररखै,

िसकवचन ैं रशकरतूँ;

ैं डरूँा। मनिसकतै?

परम्‍वर िै।

यहवचन ै;

वह उन सब

उसकशरण ैं।

अपनउदै;

िरहतै,

और नमरतबड़बनै।

रखनकरतै,

और िसलतनहीं।

वह वन अभिरखत

और हति भले?

अपने,

और अपनोंों छल ें लनरख

नवजिसमिमल आतिलसकरो, ि उसकउदें बढ़त;

मसनत

अतयदि मसें हन ै, ढ़स ै, आतसहभिै, ्‍और करै, एक मन, एक , एक िऔर एक मनसरखकर आनकरो। अहकरो, बलि नतसरों अपन्‍समझो, रतयक्‍ि अपनिनहीं, बलि सरों िरखे।

मसनतऔर महनत

ममें वहवभमसें ा, िसनपरम्‍वर वरें परम्‍वर अपनवश ें रखनवससमझा, बलि अपनकर िा, और वरकर मनसमनतें गया। उसनमनें रकट कर अपनआपकिा, और यहाँ तक आजरहि ु, ाँ सह ी। इस रण परम्‍वर उसअति महिऔर उसवह िसब ों ें ्‍ै, ि वरें और पर और े, हर टनपर िे, और हर परम्‍वर िमहििकरि मसरभै।

ें ि

अतिो, िरकमनसदआजी, उसरकवल उपसिि ें नहीं बलि अनपसिि ें ी, उससऔर अधिडरतऔर ाँपतअपने-अपनउदकरो; ोंि परम्‍वर तर अपनभलउदिइचरखनऔर करनों रभलतै।

सब िड़कऔर िििकरो, ि िऔर खरबनो, और इस िऔर रष्‍परम्‍वर िकलबनकर जगत ें ि समचमको, और वन वचन ढ़तरहो। तब मसिइस पर गरि ड़-धऔर परिरम यरगया। और ैं ि्‍बलिऔर पर अरघ-सवरूँ, ैं आनिूँ और सब आनमनूँ। आनिरहऔर आनमन

िऔर इपफ

रभें आशि िूँ, ि िषय ें नकर रसन्‍नतो। ोंि उसकनहीं, समसच्‍मन िंकरे। सब अपनिजतैं, ि मसे। परउसकयतपरििि अपनिकरतै, उसनसमै। इसलि, ैं आशकरतूँ ि अपनिि पष्‍ैं उसूँा; और रभें भरि ैं वयआऊा।

िैंआवशयक समझि ैं इपफूँ , सहकरऔर ै, परआवशयकतें ा-टहल करनै। वह सब िलनििऔर रहतोंि मनउसकिा। तव ें वह इतनि मरनपर ा, परपरम्‍वर उस पर दयी, और वल उस पर नहीं बलि पर ी, ि कहीं ुःपर ुःसहनपड़े। ैंउसऔर उतकतइसलिि उसिखकर आनिऔर ुःकम अतबड़आनरभें उसकगत करो, और ऐसों आदर िकरो; ोंि वह मसिअपनिें लकर िकट गया, ि रति ें घटरह गई ी, उसकरे।

Palavras de vida

As palavras de Deus são espírito e vida. Quem fala deve falar como oráculos de Deus, com verdade, sabedoria e edificação.

िे-समझलनें तलवसमभतैं,

परिें वसकरतैं।

िंमनमन िै,

परभलउसआनिकर ै।

धरुँवन ै,

पर्‍ों ुँपर िंरहतै।

िनमउततर ननांै,

परकटवचन नकर भड़क उठतै।

मनउसकुँिकलशबों भरतै,

और वह अपनोंों फल ्‍ै।

वश ें और वन ों ैं,

और उसकसदपयकरननतै,

वह उसकफल एगा।

परुँहर आतै, वह मन िकलतऔर वहमनअशकरतै। ोंि मन ि, हता, परस्‍गमन, यभि, ी, गवऔर िंिकलतैं।

परैं मसकहतूँ ि यरमनकहेंे, िउसकउनें पड़ा; ोंि अपनशबों िऔर अपनशबों ठहरएगा।"

ाँबच्‍ो, कर अचें कह सकतो? ोंि मन ें भरवहुँपर आतै।

ोंि हम सब बहों ें ैं। यदि अपनों ें नहीं कतवह िमनै, और अपनपर िरण रख सकतै।

यदि हम ों अपनवश ें करनिउनकुँें लगलगँ, हम उनकसकतैं। ो, जही, यदयपि िैं और हवचलैं, िएक पतविउनें जहाँ हतै। इसरकएक और बड़ी-बड़ींरतै।

ो, एक आग ितनबड़गल जलै! एक आग ै। हमों ें अधरएक ै, कलिकरतऔर वन गति ें आग लगै, तथवयनरक आग जलै। ोंि हर रकवन-पशऔर पकी, ेंगनऔर सममनयजि वश ें िसकतैं और वश ें कर िगए ैं, परमनवश ें नहीं कर सकता। यह ऐसांनहीं रहतऔर णनशक िभरै।

अति्‍नने, और ननमस वचन ै। परैं कहतूँ, "उनोंनहीं ा?" उनोंअवश:

उनकपर,

और उनकवचन जगत तक

गए ैं।

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