Poder
O poder de Deus opera nos que creem. A Bíblia revela que o cristão recebe poder do alto para viver, servir e vencer — não por força própria, mas pelo Espírito de Deus.
Poder do Espírito Santo
Jesus prometeu que seus seguidores receberiam poder ao descer sobre eles o Espírito Santo. Esse poder capacita para testemunho e serviço.
परंतु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ्य पाओगे, और यरूशलेम में और सारे यहूदिया और सामरिया में और पृथ्वी के छोर तक मेरे साक्षी होगे।"
क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं बल्कि सामर्थ्य, प्रेम और संयम की आत्मा दी है।
देखो, मैंने तुम्हें साँपों और बिच्छुओं को रौंदने का और शत्रु की सारी शक्ति पर अधिकार दिया है; और तुम्हें किसी से कुछ भी हानि न होगी।
Poder na Palavra e na fé
A Palavra de Deus é viva e eficaz, mais cortante que espada de dois gumes. O poder não está em palavras, mas na demonstração do Espírito.
परमेश्वर का वचन जीवित, प्रभावशाली और किसी भी दोधारी तलवार से अधिक तेज़ है, जो प्राण और आत्मा, जोड़ों और मज्जा को आर-पार भेदकर अलग करता है, और मन के विचारों और अभिप्रायों को परखता है।
क्योंकि परमेश्वर का राज्य बातों में नहीं बल्कि सामर्थ्य में है।
विश्वास करनेवालों में ये चिह्न होंगे : वे मेरे नाम से दुष्टात्माओं को निकालेंगे, नई-नई भाषाएँ बोलेंगे, वे साँपों को हाथों से उठा लेंगे और यदि वे कोई प्राणनाशक विष भी पी जाएँ फिर भी उन्हें हानि नहीं होगी; वे बीमारों पर हाथ रखेंगे और वे स्वस्थ हो जाएँगे।"
"मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, जो मुझ पर विश्वास करता है, वह भी उन कार्यों को करेगा जिन्हें मैं करता हूँ, बल्कि इनसे भी बड़े कार्य करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूँ;
Fortalecidos pelo Senhor
Tudo posso naquele que me fortalece. O cristão encontra poder não em si mesmo, mas na força do Senhor e na sua armadura espiritual.
मैं मसीह में, जो मुझे सामर्थ्य देता है, सब कुछ कर सकता हूँ।
अंततः प्रभु में और उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवंत बनो।
और उसकी महिमा की शक्ति के अनुसार हर प्रकार के सामर्थ्य से बलवंत होते जाओ ताकि तुम हर प्रकार का धीरज और सहनशीलता प्राप्त करो, और आनंद के साथ
इसलिए परमेश्वर के अधीन हो जाओ; शैतान का सामना करो, और वह तुम्हारे पास से भाग जाएगा।
उसने उठकर आँधी को डाँटा और झील से कहा,"शांत हो जा! थम जा!" और आँधी थम गई और बड़ी शांति छा गई। तब उसने उनसे कहा,"तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अभी भी विश्वास नहीं?" वे अत्यंत भयभीत हो गए और आपस में कहने लगे, "आखिर यह है कौन कि आँधी और झील भी इसकी आज्ञा मानते हैं?"