Preservação das escrituras: como Deus protegeu sua Palavra
A garantia de que a Palavra de Deus permanece
A preservação das Escrituras é o princípio bíblico de que Deus sustentou a integridade de sua mensagem ao longo da história. O texto sagrado não resistiu aos séculos por mero acaso cultural, mas pelo compromisso divino em cumprir tudo o que revelou.
Jesus afirmou com clareza que nem o menor traço da Lei deixaria de se cumprir. Enquanto as estruturas do mundo passam e a vida humana se esvai como a relva, a mensagem do Senhor permanece inalterada para cada geração.
अकास अऊ धरती ह टर जाही, पर मोर बचन ह कभू नइं टरय।(मत्ती 24:35)
मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि जब तक स्वरग अऊ धरती हवय, तब तक मूसा के कानून के एक छोटे अकछर या बिन्दू घलो पूरा होय बिगर खतम नइं होवय।(मत्ती 5:18)
कांदी ह मुरझा जाथे अऊ फूलमन झर जाथें,
पर हमर परमेसर के बचन सदाकाल तक बने रहिथे।"(यसायाह 40:8)
तुमन नासमान नइं, पर अबिनासी बीजा ले परमेसर के जीयत अऊ सदा ठहरइया बचन के दुवारा नवां जनम पाय हवव। काबरकि,
"जम्मो मनखेमन कांदी के सहीं अंय,
अऊ ओमन के जम्मो महिमा ह जंगली फूल सहीं अय;
कांदी ह मुरझा जाथे अऊ फूलमन झर जाथें,
पर परभू के बचन सदाकाल तक बने रहिथे।"
अऊ येह ओही सुघर संदेस के बचन ए, जऊन ह तुमन ला सुनाय गे हवय।(1 पतरस 1:23-25)
काबरकि,
"जम्मो मनखेमन कांदी के सहीं अंय,
अऊ ओमन के जम्मो महिमा ह जंगली फूल सहीं अय;
कांदी ह मुरझा जाथे अऊ फूलमन झर जाथें,
पर परभू के बचन सदाकाल तक बने रहिथे।"
अऊ येह ओही सुघर संदेस के बचन ए, जऊन ह तुमन ला सुनाय गे हवय।(1 पतरस 1:24,25)
Da inspiração divina ao registro humano
A preservação do texto está diretamente ligada à sua origem. A Escritura não nasceu da vontade ou de conjecturas humanas; homens foram conduzidos pelo Espírito Santo para registrar fielmente a vontade de Deus em contextos históricos reais.
Ao longo do tempo, essa revelação progressiva culminou na encarnação de Jesus Cristo, o Verbo vivo. Tudo o que Deus realizou e comunicou carrega valor permanente e não pode ser desfeito pelo tempo.
सबले पहिली, तुमन ये बात ला जरूर समझ लेवव कि परमेसर के बचन म बताय अगम के बात ह काकरो खुद के बचन के बखान नो हय। काबरकि अगमबानी के सुरूआत मनखे के ईछा ले कभू नइं होईस, पर मनखेमन पबितर आतमा के अगुवई म, परमेसर कोति ले बोलिन।(2 पतरस 1:20,21)
पहिली जमाना म, परमेसर ह हमर पुरखामन ले, कतको बार अऊ कतको किसम ले अगमजानीमन के दुवारा गोठियाईस, पर ये आखिरी दिन म, ओह हमर ले अपन बेटा के दुवारा गोठियाईस, जऊन ला ओह जम्मो चीज के ऊपर वारिस ठहिराईस अऊ ओकरे दुवारा, ओह संसार ला बनाईस। बेटा ही परमेसर के महिमा के अंजोर ए अऊ ओह परमेसर के रूप के एकदम सही परतिनिधि ए अऊ ओह अपन सामर्थी बचन के दुवारा जम्मो चीजमन ला संभालके रखथे। ओह मनखेमन के पाप ला सुध करे के बाद, स्वरग म महामहिम परमेसर के जेवनी हांथ कोति जा बईठिस।(इबरीमन 1:1-3)
ओ बचन ह मनखे के देहें धारन करिस, अऊ हमर बीच म कुछू समय बर डेरा करिस। हमन ओकर महिमा देखे हवन, ओ एकलऊता बेटा के महिमा, जऊन ह अनुग्रह अऊ सच्चई ले भरपूर होके स्वरगीय ददा करा ले आईस।(यूहन्ना 1:14)
मेंह जानत हंव कि हर ओ काम जेला परमेसर करथे, हमेसा बर बने रहिही, येमा कुछू घलो जोड़े नइं जा सकय अऊ न ही येमा ले कुछू हटाय जा सकय। परमेसर ह अइसे करथे ताकि मनखेमन ओकर भय मानंय।(सभोपदेसक 3:14)
O propósito da preservação na vida diária
Deus não preservou a Escritura apenas como arquivo da antiguidade, mas como instrumento de vida. O texto sagrado foi mantido acessível para gerar fé, conduzir ao arrependimento e orientar as decisões práticas de cada dia.
Guardar a Palavra na memória e no coração protege contra o erro moral e sustenta a esperança em períodos difíceis. Transmitir esse conhecimento de pais para filhos assegura que a verdade do Evangelho continue alcançando e transformando vidas.
यहोवा के बचन म कोनो कमी नइं ए,
येह भट्ठी म सुध करे गे चांदी के सहीं अय,
ये सात बार सुध करे गे सोन के सहीं अय।
हे यहोवा, तेंह जरूरतमंद ला सही-सलामत रखबे
अऊ हमन ला हमेसा बर ओ दुस्टमन ले बचाय रखबे,(भजन-संहिता 12:6,7)
स्वरग ह परमेसर के महिमा के बखान करत हे;
अकास ह ओकर हांथ के काम ला परगट करत हे।
हर दिन ओमन बखान करथें;
हर रथिया ओमन गियान परगट करथें।
ओमन के कोनो बोली नइं ए, ओमन कोनो सबद के उपयोग नइं करंय;
ओमन ले कोनो अवाज सुनई नइं देय।
तभो ले ओमन के अवाज जम्मो धरती म जाथे,
ओमन के सबद संसार के छोर तक हबरथे।
अकास म परमेसर ह सूरज बर एक तम्बू ताने हवय।
येह एक दूल्हा के अपन कमरा ले बाहिर निकलके आय सहीं ए,
येह एक बिजेता के सहीं अय, जऊन ह अपन दऊड़ ला दऊड़े बर आनंदित हे।
येह अकास के एक छोर ले निकलथे
अऊ दूसर छोर तक चक्कर लगाथे;
जम्मो चीज ला येकर गरमी मिलथे।
यहोवा के कानून ह बिलकुल सही ए,
अऊ येह आतमा ला ताजा कर देथे।
यहोवा के बिधिमन भरोसा के लईक अंय,
अऊ येमन सधारन मनखे ला बुद्धिमान बना देथें।
यहोवा के उपदेसमन सही अंय,
अऊ येमन हिरदय ला आनंदित करथें।
यहोवा के हुकूममन चमकीला एं,
अऊ येमन आंखी ला अंजोर देथें।(भजन-संहिता 19:1-8)
मेंह तोर बचन ला अपन हिरदय म रखे हंव
ताकि मेंह तोर बिरूध पाप झन करंव।(भजन-संहिता 119:11)
ये हुकूम, जेमन ला आज मेंह तुमन ला देवत हंव, येमन तुम्हर हिरदय म रहंय। येमन ला अपन लइकामन ला सिखावव। जब तुमन घर म बईठथव अऊ डहार म रेंगथव, जब तुमन लेटथव अऊ उठथव, त येमन ला सिखाय करव। चिनहां के रूप म येमन ला अपन हांथ म बांध लव अऊ येमन ला अपन माथा म बांध लव। येमन ला अपन घर के चौखटमन म अऊ अपन दुवारमन म लिखव।(ब्यवस्था 6:6-9)
पर येह का कहिथे? "परमेसर के बचन ह तुम्हर लकठा म हवय; येह तुम्हर मुहूं म अऊ तुम्हर मन म हवय।" येह ओही बिसवास के बचन अय, जेकर परचार हमन करथन।(रोमीमन 10:8)
येह साफ ए कि बिसवास ह संदेस के सुने ले होथे, अऊ संदेस के सुनई ह मसीह के बचन ले होथे। पर मेंह पुछत हंव: का ओमन नइं सुनिन? ओमन जरूर सुनिन:
"ओमन के अवाज ह जम्मो धरती म,
अऊ ओमन के बचन ह संसार के छोर तक हबर गे हवय।"(रोमीमन 10:17,18)
परमेसर के बचन म जऊन बातमन पहिली ले लिखे गे हवंय, ओमन हमर सिकछा बर अंय, ताकि हमन धीरता अऊ बचन के उत्साह के जरिये मसीह यीसू के आसा म बने रहन।(रोमीमन 15:4)
येह बने बात ए अऊ येह हमर उद्धार करइया परमेसर ला भाथे। ओह चाहथे कि जम्मो मनखेमन के उद्धार होवय अऊ ओमन सत के गियान ला जानंय।(1 तीमुथियुस 2:3,4)
अऊ तुमन जान सकव कि मसीह के मया ह हमर गियान ले बढ़के होथे, ताकि तुमन परमेसर के जम्मो भरपूरी ले भर जावव।(इफिसुस 3:19)
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