Sabedoria
A sabedoria é um dos temas mais ricos da Bíblia. O temor do Senhor é seu princípio, e buscá-la vale mais que ouro ou prata. Deus promete dar sabedoria generosamente a quem pedir com fé.
O princípio da sabedoria
O temor do Senhor é o início de toda sabedoria verdadeira. Quem reverencia a Deus aprende a viver com discernimento e prudência.
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ 'इल्म की शुरू’आत है;
लेकिन बेवक़ूफ़ हिकमत और तरबियत की हिक़ारत करते हैं।
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ हिकमत का शुरू' है,
और उस क़ुद्दुस की पहचान समझ है।
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ हिकमत की तरबियत है,
और सरफ़राज़ी से पहले फ़रोतनी है।
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ समझ का शुरू' है;
उसके मुताबिक 'अमल करने वाले अक़्लमंद हैं।
उसकी सिताइश हमेशा तक क़ाईम है।
लेकिन हिकमत कहाँ मिलेगी?
और 'अक़्लमन्दी की जगह कहाँ है
न इंसान उसकी क़द्र जानता है,
न वह ज़िन्दों की सर ज़मीन में मिलती है।
गहराव कहता है, वह मुझ में नहीं है,
और समन्दर भी कहता है वह मेरे पास नहीं है।
न वह सोने के बदले मिल सकती है,
न चाँदी उसकी क़ीमत के लिए तुलेगी।
न ओफ़ीर का सोना उसका मोल हो सकता है
और न क़ीमती सुलैमानी पत्थर या नीलम।
न सोना और काँच उसकी बराबरी कर सकते हैं,
न चोखे सोने के ज़ेवर उसका बदल ठहरेंगे।
मोंगे और बिल्लौर का नाम भी नहीं लिया जाएगा,
बल्कि हिकमत की क़ीमत मरजान से बढ़कर है।
न कूश का पुखराज उसके बराबर ठहरेगा न चोखा सोना उसका मोल होगा।
फिर हिकमत कहाँ से आती है,
और 'अक़्लमन्दी की जगह कहाँ है।
जिस हाल कि वह सब ज़िन्दों की आँखों से छिपी है,
और हवा के परिंदों से पोशीदा रख्खी गई है
हलाकत और मौत कहती है,
'हम ने अपने कानों से उसकी अफ़वाह तो सुनी है।"
Sabedoria como dom de Deus
A verdadeira sabedoria vem do alto. Deus a concede generosamente a quem pede com fé, sem lançar em rosto a fraqueza humana.
लेकिन अगर तुम में से किसी में हिक्मत की कमी हो तो ख़ुदा से माँगे जो बग़ैर मलामत किए सब को बहुतायत के साथ देता है। उसको दी जाएगी।
लेकिन अगर तुम में से किसी में हिक्मत की कमी हो तो ख़ुदा से माँगे जो बग़ैर मलामत किए सब को बहुतायत के साथ देता है। उसको दी जाएगी।
लेकिन अगर तुम में से किसी में हिक्मत की कमी हो तो ख़ुदा से माँगे जो बग़ैर मलामत किए सब को बहुतायत के साथ देता है। उसको दी जाएगी।
क्यूँकि ख़ुदावन्द हिकमत बख़्शता है;
'इल्म — ओ — समझ उसी के मुँह से निकलते हैं।
क्यूँकि ख़ुदावन्द हिकमत बख़्शता है;
'इल्म — ओ — समझ उसी के मुँह से निकलते हैं।
बल्कि अगर तू 'अक़्ल को पुकारे,
और समझ के लिए आवाज़ बलन्द करे
तो तू ख़ुदावन्द के ख़ौफ़ को समझेगा,
और ख़ुदा के ज़रिए' को हासिल करेगा।
मैं तेरा शुक्र करता हूँ और तेरी 'इबा’दत करता हूँ ऐ मेरे बाप — दादा के ख़ुदा, जिसने मुझे हिकमत और कु़दरत बख़्शी और जो कुछ हम ने तुझ से माँगा तू ने मुझ पर ज़ाहिर किया, क्यूँकि तू ने बादशाह का मुआ’मिला हम पर ज़ाहिर किया है।"
दानीएल ने कहा: "ख़ुदा का नाम हमेशा तक मुबारक हो, क्यूँकि हिकमत और कु़दरत उसी की है।
तब ख़ुदा ने उन चारों जवानों को मा’रिफ़त और हर तरह की हिकमत और 'इल्म में महारत बख़्शी, और दानीएल हर तरह की रोया और ख़्वाब में साहब — ए — 'इल्म था।
A sabedoria do alto
A sabedoria que vem de Deus é pura, pacífica, amável, cheia de misericórdia e de bons frutos. Ela se opõe à sabedoria terrena e mundana.
मगर जो हिक्मत ऊपर से आती है अव्वल तो वो पाक होती है फिर मिलनसार नर्मदिल और तरबियत पज़ीर रहम और अच्छे फलों से लदी हुई बेतरफ़दार और बे — रिया होती है।
मगर जो हिक्मत ऊपर से आती है अव्वल तो वो पाक होती है फिर मिलनसार नर्मदिल और तरबियत पज़ीर रहम और अच्छे फलों से लदी हुई बेतरफ़दार और बे — रिया होती है।
मगर जो हिक्मत ऊपर से आती है अव्वल तो वो पाक होती है फिर मिलनसार नर्मदिल और तरबियत पज़ीर रहम और अच्छे फलों से लदी हुई बेतरफ़दार और बे — रिया होती है।
तुम में दाना और फ़हीम कौन है? जो ऐसा हो वो अपने कामों को नेक चाल चलन के वसीले से उस हलीमी के साथ ज़ाहिर करें जो हिक्मत से पैदा होता है।
फिर भी कामिलों में हम हिक्मत की बातें कहते हैं लेकिन इस जहान की और इस जहान के नेस्त होनेवाले हाकिमों की अक़्ल नहीं। बल्कि हम ख़ुदा के राज़ की हक़ीक़त बातों के तौर पर बयान करते हैं, जो ख़ुदा ने जहान के शुरू से पहले हमारे जलाल के वास्ते मुक़र्रर की थी।
मगर हम उस मसीह मस्लूब का ऐलान करते हैं जो यहूदियों के नज़दीक ठोकर और ग़ैर क़ौमों के नज़दीक बेवक़ूफ़ी है।
लेकिन जो बुलाए हुए हैं यहूदी हों या यूनानी उन के नज़दीक मसीह ख़ुदा की क़ुदरत और ख़ुदा की हिक्मत है। क्यूँकि ख़ुदा की बेवक़ूफ़ी आदमियों की हिक्मत से ज़्यादा हिक्मत वाली है और ख़ुदा की कमज़ोरी आदमियों के ज़ोर से ज़्यादा ताक़तवर है।
कोई अपने आप को धोखा न दे अगर कोई तुम में अपने आप को इस जहान में हकीम समझे, तो बेवक़ूफ़ बने ताकि हकीम हो जाए।
कोई अपने आप को धोखा न दे अगर कोई तुम में अपने आप को इस जहान में हकीम समझे, तो बेवक़ूफ़ बने ताकि हकीम हो जाए।
मेरी कोशिश यह है कि उन की दिली हौसला अफ़्ज़ाई की जाए और वह मुहब्बत में एक हो जाएँ, कि उन्हें वह ठोस भरोसा हासिल हो जाए जो पूरी समझ से पैदा होता है। क्यूँकि मैं चाहता हूँ कि वह ख़ुदा का राज़ जान लें। राज़ क्या है? मसीह ख़ुद। उसी में हिक्मत और इल्म — ओ — 'इरफ़ान के तमाम ख़ज़ाने छुपे हैं।
Direção e discernimento
Deus guia os humildes na justiça e ensina seu caminho aos mansos. Ele promete dirigir nossos passos quando confiamos nele de todo o coração.
सारे दिल से ख़ुदावन्द पर भरोसा कर,
और अपनी समझ पर इत्मिनान न कर।
अपनी सब राहों में उसको पहचान,
और वह तेरी रहनुमाई करेगा।
तू अपनी ही निगाह में 'अक़्लमन्द न बन,
ख़ुदावन्द से डर और बदी से किनारा कर।
मैं तुझे ता’लीम दूँगा, और जिस राह पर तुझे चलना होगा तुझे बताऊँगा;
मैं तुझे सलाह दूँगा, मेरी नज़र तुझ पर होगी।
वह हलीमों को इन्साफ़ की हिदायत करेगा,
हाँ, वह हलीमों को अपनी राह बताएगा।
ऐ ख़ुदावन्द, अपनी राहें मुझे दिखा;
अपने रास्ते मुझे बता दे।
मुझे अपनी सच्चाई पर चला और ता’लीम दे,
क्यूँकि तू मेरा नजात देने वाला ख़ुदा है;
मैं दिन भर तेरा ही मुन्तज़िर रहता हूँ।
इंसान की चाल चलन ख़ुदावन्द की तरफ़ से क़ाईम हैं,
और वह उसकी राह से ख़ुश है;
सुबह को मुझे अपनी शफ़क़त की ख़बर दे,
क्यूँकि मेरा भरोसा तुझ पर है।
मुझे वह राह बता जिस पर मैं चलूं,
क्यूँकि मैं अपना दिल तेरी ही तरफ़ लगाता हूँ।
मुझे सिखा के तेरी मर्ज़ी पर चलूँ, इसलिए कि तू मेरा ख़ुदा है!
तेरी नेक रूह मुझे रास्ती के मुल्क में ले चले!
ऐ ख़ुदावन्द, अपने नाम की ख़ातिर मुझे ज़िन्दा कर!
अपनी सदाक़त में मेरी जान को मुसीबत से निकाल!
ऐ ख़ुदावन्द, मुझे अपनी राह बता,
और मेरे दुश्मनों की वजह से मुझे हमवार रास्ते पर चला।
A Palavra como fonte de sabedoria
A Palavra de Deus é lâmpada para os pés e luz para o caminho. Meditar nas Escrituras nos dá entendimento superior ao dos mestres.
तेरा कलाम मेरे क़दमों के लिए चराग़,
और मेरी राह के लिए रोशनी है।
तेरा कलाम मेरे क़दमों के लिए चराग़,
और मेरी राह के लिए रोशनी है।
मेरी आँखे खोल दे,
ताकि मैं तेरी शरीअत के 'अजायब देखूँ।
तेरी बातों की तशरीह नूर बख़्शती है,
वह सादा दिलों को 'अक़्लमन्द बनाती है।
मुबारक है वह आदमी जो शरीरों की सलाह पर नहीं चलता,
और ख़ताकारों की राह में खड़ा नहीं होता;
और ठट्ठा बाज़ों की महफ़िल में नहीं बैठता।
बल्कि ख़ुदावन्द की शरी’अत में ही उसकी ख़ुशी है;
और उसी की शरी’अत पर दिन रात उसका ध्यान रहता है।
तुम्हारी ज़िन्दगी में मसीह के कलाम की पूरी दौलत घर कर जाए। एक दूसरे को हर तरह की हिक्मत से तालीम देते और समझाते रहो। साथ साथ अपने दिलों में ख़ुदा के लिए शुक्रगुज़ारी के साथ ज़बूर, हम्द — ओ — सना और रुहानी गीत गाते रहो।
यह चलते वक़्त तेरी रहबरी,
और सोते वक़्त तेरी निगहबानी,
और जागते वक़्त तुझ से बातें करेगी।
Sabedoria prática para o dia a dia
A sabedoria se aplica em cada decisão: nas finanças, nos relacionamentos, no trabalho e no uso do tempo. Vivamos como sábios, não como insensatos.
पस ग़ौर से देखो कि किस तरह चलते हो, नादानों की तरह नहीं बल्कि अक़्लमंदों की तरह चलो; और वक़्त को ग़नीमत जानो क्यूँकि दिन बुरे हैं।
पस ग़ौर से देखो कि किस तरह चलते हो, नादानों की तरह नहीं बल्कि अक़्लमंदों की तरह चलो; और वक़्त को ग़नीमत जानो क्यूँकि दिन बुरे हैं।
मश्वरत को सुन और तरबियत पज़ीर हो,
ताकि तू आख़िर कार 'अक़्लमन्द हो जाए।
मश्वरत को सुन और तरबियत पज़ीर हो,
ताकि तू आख़िर कार 'अक़्लमन्द हो जाए।
जो हिकमत हासिल करता है अपनी जान को 'अज़ीज़ रखता है;
जो समझ की मुहाफ़िज़त करता है फ़ाइदा उठाएगा।
हर एक काम मश्वरत से ठीक होता है,
और तू नेक सलाह लेकर जंग कर।
क्यूँकि तू नेक सलाह लेकर जंग कर सकता है,
और सलाहकारों की कसरत में सलामती है।
जो क़हर करने में धीमा है,
बड़ा 'अक़्लमन्द है लेकिन वह जो बेवक़ूफ़ है हिमाकत को बढ़ाता है।
तकब्बुर से सिर्फ़ झगड़ा पैदा होताहै,
लेकिन मश्वरत पसंद के साथ हिकमत है।
अपने मुँह की निगहबानी करने वाला अपनी जान की हिफ़ाज़त करता है
लेकिन जो अपने होंट पसारता है, हलाक होगा।
बेवक़ूफ़ का चाल चलन उसकी नज़र में दुरस्त है,
लेकिन 'अक़्लमंद नसीहत को सुनता है।
तकब्बुर के साथ बुराई आती है,
लेकिन ख़ाकसारों के साथ हिकमत है।
'अक़्लमंद दिल फ़रमान बजा लाएगा, लेकिन बकवासी बेवक़ूफ़ पछाड़ खाएगा।
होशियार का दिल 'इल्म हासिल करता है,
और 'अक़्लमन्द के कान 'इल्म के तालिब हैं।
बेवक़ूफ़ समझ से ख़ुश नहीं होता,
लेकिन सिर्फ़ इस से कि अपने दिल का हाल ज़ाहिर करे।
बेवक़ूफ़ भी जब तक ख़ामोश है, 'अक्लमन्द गिना जाता है;
जो अपने लब बलंद रखता है, होशियार है।
ताकि 'अक़्लमंद आदमी सुनकर 'इल्म में तरक़्क़ी करे
और समझदार आदमी दुरुस्त मश्वरत तक पहुँचे,
जो अब तक ईमान न लाए हों उन के साथ अक़्लमन्दी का सुलूक करो। इस सिलसिले में हर मौक़े से फ़ाइदा उठाओ। तुम्हारी बातें हर वक़्त मेहरबान हो, ऐसी कि मज़ा आए और तुम हर एक को मुनासिब जवाब दे सको।
जो अब तक ईमान न लाए हों उन के साथ अक़्लमन्दी का सुलूक करो। इस सिलसिले में हर मौक़े से फ़ाइदा उठाओ। तुम्हारी बातें हर वक़्त मेहरबान हो, ऐसी कि मज़ा आए और तुम हर एक को मुनासिब जवाब दे सको।
जो कुछ भी तुम करते हो उसे पूरी लगन के साथ करो, इस तरह जैसा कि तुम न सिर्फ़ इंसान ों की बल्कि ख़ुदावन्द की ख़िदमत कर रहे हो। तुम तो जानते हो कि ख़ुदावन्द तुम को इस के मुआवज़े में वह मीरास देगा जिस का वादा उस ने किया है। हक़ीक़त में तुम ख़ुदावन्द मसीह की ही ख़िदमत कर रहे हो।
O valor da sabedoria
A sabedoria é mais preciosa que rubis. Quem a encontra, encontra a vida e alcança o favor do Senhor. Nada se compara a ela.
मुबारक है वह आदमी जो हिकमत को पाता है,
और वह जो समझ हासिल करता है,
क्यूँकि जो मुझ को पाता है, ज़िन्दगी पाता है,
और वह ख़ुदावन्द का मक़बूल होगा।
हिकमत का हुसूल सोने से बहुत बेहतर है,
और समझ का हुसूल चाँदी से बहुत पसन्दीदा है।
आदमी का दिल आपनी राह ठहराता है
लेकिन ख़ुदावन्द उसके क़दमों की रहनुमाई करता है।
दिल की तदबीरें इंसान से हैं,
लेकिन ज़बान का जवाब ख़ुदावन्द की तरफ़ से है।
क्यूँकि हिकमत वैसी ही पनाहगाह है जैसे रुपया,
लेकिन 'इल्म की ख़ास खू़बी ये है कि हिकमत साहिब — ए — हिकमत की जान की मुहाफ़िज़ है।
तू ये न कह कि, अगले दिन इनसे क्यूँकर बेहतर थे?
क्यूँकि तू 'अक़्लमन्दी से इस अम्र की तहक़ीक़ नहीं करता।
क्यूँकि वह उस आदमी को जो उसके सामने अच्छा है, हिकमत और दानाई और ख़ुशी बख़्शता है; लेकिन गुनहगार को ज़हमत देता है कि वह जमा' करे और अम्बार लगाए, ताकि उसे दे जो ख़ुदा का पसंदीदा है। ये भी बेकार और हवा की चरान है।
जो काम तेरा हाथ करने को पाए उसे मक़दूर भर कर क्यूँकि पाताल में जहाँ तू जाता है न काम है न मन्सूबा, न 'इल्म न हिकमत।
A sabedoria e a soberania de Deus
Os caminhos de Deus são mais altos que os nossos. Sua sabedoria é insondável, eterna e infinitamente superior ao entendimento humano.
क्यूँकि जिस क़दर आसमान ज़मीन से बलन्द है, उसी क़दर मेरी राहें तुम्हारी राहों से और मेरे ख़याल तुम्हारे ख़यालों से बलन्द हैं।
ख़ुदावन्द फ़रमाता है कि मेरे ख़याल तुम्हारे ख़याल नहीं, और न तुम्हारी राहें मेरी राहें हैं।
क्या तू नहीं जानता, क्या तूने नहीं सुना? कि ख़ुदावन्द हमेशा का ख़ुदा व तमाम ज़मीन का ख़ालिक़ थकता नहीं और मांदा नहीं होता उसकी हिकमत इदराक से बाहर है।
क्या तू नहीं जानता, क्या तूने नहीं सुना? कि ख़ुदावन्द हमेशा का ख़ुदा व तमाम ज़मीन का ख़ालिक़ थकता नहीं और मांदा नहीं होता उसकी हिकमत इदराक से बाहर है।
ख़ुदावन्द ख़ुदा ने मुझ को शागिर्द की ज़बान बख़्शी, ताकि मैं जानूँ कि कलाम के वसीले से किस तरह थके माँदे की मदद करूँ। वह मुझे हर सुबह जगाता है, और मेरा कान लगाता है ताकि शागिदों की तरह सुनूँ।
उसपर अफ़सोस, जो मदद के लिए मिस्र को जाते और घोड़ों पर एतमाद करते हैं और रथों पर भरोसा रखते हैं इसलिए कि वह बहुत हैं, और सवारों पर इसलिए कि वह बहुत ताक़तवर हैं; लेकिन इस्राईल के क़ुददूस पर निगाह नहीं करते और ख़ुदावन्द के तालिब नहीं होते। लेकिन वह भी तो 'अक़्लमन्द है और बला नाज़िल करेगा, और अपने कलाम को बातिल न होने देगा वह शरीरों के घराने पर और उन पर जो बदकिरदारों की हिमायत करते हैं चढ़ाई करेगा।
यह भी रब्ब — उल — अफ़वाज से मुक़र्रर हुआ है, जिसकी मसलहत 'अजीब और दानाई 'अज़ीम है।
और ख़ुदावन्द की रूह उस पर ठहरेगी हिकमत और ख़िरद की रूह, मसलहत और क़ुदरत की रूह, मा’रिफ़त और ख़ुदावन्द के ख़ौफ़ की रूह। और उसकी शादमानी ख़ुदावन्द के ख़ौफ़ में होगी। और वह न अपनी आँखों के देखने के मुताबिक़ इन्साफ़ करेगा, और न अपने कानों के सुनने के मुवाफ़िक़ फ़ैसला करेगा;
और ख़ुदावन्द हमेशा तेरी रहनुमाई करेगा, और ख़ुश्क साली में तुझे सेर करेगा और तेरी हड्डियों को कु़व्वत बख़्शेगा; तब तू सेराब बाग़ की तरह होगा और उस चश्मे की तरह जिसका पानी कम न हो।
वाह! ख़ुदा की दौलत और हिक्मत और इल्म क्या ही अज़ीम है उसके फ़ैसले किस क़दर पहुँच से बाहर हैं और उसकी राहें क्या ही बे’निशान हैं।
उसी वाहिद हकीम ख़ुदा की ईसा मसीह के वसीले से हमेशा तक बड़ाई होती रहे। आमीन।
और हम को मा’लूम है कि सब चीज़ें मिल कर ख़ुदा से मुहब्बत रखनेवालों के लिए भलाई पैदा करती है; या’नी उनके लिए जो ख़ुदा के इरादे के मुवाफ़िक़ बुलाए गए।
ऐ ख़ुदावन्द, तेरी कारीगरी कैसी बेशुमार हैं।
तूने यह सब कुछ हिकमत से बनाया;
ज़मीन तेरी मख़लूक़ात से मा’मूर है।
हमारा ख़ुदावन्द बुजु़र्ग और कु़दरत में 'अज़ीम है;
उसके समझ की इन्तिहा नहीं।
तू अपनी मसलहत से मेरी रहनुमाई करेगा,
और आख़िरकार मुझे जलाल में कु़बूल फ़रमाएगा।
हम को अपने दिन गिनना सिखा,
ऐसा कि हम अक़्ल दिल हासिल करें।
सादिक़ के मुँह से दानाई निकलती है,
और उसकी ज़बान से इन्साफ़ की बातें।
ख़ुदावन्द में मसरूर रह,
और वह तेरे दिल की मुरादें पूरी करेगा।
ऐ ख़ुदावन्द! मेरे दुश्मनों की वजह से मुझे अपनी सदाक़त में चला;
मेरे आगे आगे अपनी राह को साफ़ कर दे।
तू मुझे ज़िन्दगी की राह दिखाएगा;
तेरे हुज़ूरमें कामिल शादमानी है।
तेरे दहने हाथ में हमेशा की खु़शी है।
वह रोते और मुनाजात करते हुए आएँगे, मैं उनकी रहबरी करूँगा; मैं उनको पानी की नदियों की तरफ़ राह — ए — रास्त पर चलाऊँगा, जिसमें वह ठोकर न खाएँगे; क्यूँकि मैं इस्राईल का बाप हूँ और इफ़्राईम मेरा पहलौठा है।
ऐ ख़ुदावन्द, मैं जानता हूँ कि इंसान की राह उसके इख़्तियार में नहीं; इंसान अपने चाल चलन में अपने क़दमों की रहनुमाई नहीं कर सकता।
उसी ने अपनी क़ुदरत से ज़मीन को बनाया, उसी ने अपनी हिकमत से जहान को क़ाईम किया और अपनी 'अक़्ल से आसमान को तान दिया है।
कल की बारे में घमण्ड़ न कर,
क्यूँकि तू नहीं जानता कि एक ही दिन में क्या होगा।
शरीर 'अद्ल से आगाह नहीं,
लेकिन ख़ुदावन्द के तालिब सब कुछ समझते हैं।
अब जो ऐसा क़ादिर है कि उस क़ुदरत के मुवाफ़िक़ जो हम में तासीर करती है, हामारी गुज़ारिश और ख़याल से बहुत ज़्यादा काम कर सकता है, कलीसिया में और ईसा मसीह में पुश्त — दर — पुश्त और हमेशा हमेशा उसकी बड़ाई होती रहे। आमीन।
ये तीसरी बार मैं तुम्हारे पास आता हूँ। दो या तीन गवाहों कि ज़बान से हर एक बात साबित हो जाएगी।
क्या आप कलाम — ए — मुक़द्दस की यह हिम्मत बढ़ाने वाली बात भूल गए हैं जो आप को ख़ुदा के फ़र्ज़न्द ठहरा कर बयान करती है, क्यूँकि जो ख़ुदा को प्यारा है उस की वह हिदायत करता है, क्यूँकि जिसको फ़रज़न्द बनालेता है उसके कोड़े भी लगाता है
ग़रज़ ऐ भाइयों! जितनी बातें सच हैं, और जितनी बातें शराफ़त की हैं, और जितनी बातें वाजिब हैं, और जितनी बातें पाक हैं, और जितनी बातें पसन्दीदा हैं, और जितनी बातें दिलकश हैं; ग़रज़ जो नेकी और ता 'रीफ़ की बातें हैं, उन पर ग़ौर किया करो।
पस कल के लिए फ़िक्र न करो क्यूँकि कल का दिन अपने लिए आप फ़िक्र कर लेगा; आज के लिए आज ही का दु:ख काफ़ी है।
दक्खिन की मलिका 'अदालत के दिन इस ज़माने के लोगों के साथ उठकर इनको मुजरिम ठहराएगी; क्यूँकि वो दुनिया के किनारे से सुलैमान की हिक्मत सुनने को आई; और देखो यहाँ वो है जो सुलैमान से भी बड़ा है।
"पस जो कोई मेरी यह बातें सुनता और उन पर अमल करता है वह उस अक़्लमन्द आदमी की तरह ठहरेगा जिस ने चट्टान पर अपना घर बनाया।
क्यूँकि मैं तुम को ऐसे अल्फ़ाज़ और हिक्मत अता करूँगा, कि तुम्हारे तमाम मुख़ालिफ़ न उस का मुक़ाबिला और न उस का जवाब दे सकेंगे।
ज़ाहिर के मुवाफ़िक़ फ़ैसला न करो, बल्कि इन्साफ़ से फ़ैसला करो।"
ख़ुदावन्द ने हिकमत से ज़मीन की बुनियाद डाली;
और समझ से आसमान को क़ाईम किया।
बुड्ढों में समझ होती है
, और उम्र की दराज़ी में समझदारी।
ख़ुदा में समझ और कु़व्वत है,
उसके पास मसलहत और समझ है।
फ़िर अय्यूब ने जवाब दिया
दर हक़ीक़त में मैं जानता हूँ कि बात यूँ ही है,
लेकिन इंसान ख़ुदा के सामने कैसे रास्तबाज़ ठहरे।
अगर वह उससे बहस करने को राज़ी भी हो,
यह तो हज़ार बातों में से उसे एक का भी जवाब न दे सकेगा।
वह दिल का 'अक़्लमन्द और ताक़त में ज़ोरआवर है,
किसी ने हिम्मत करके उसका सामना किया है और बढ़ा हो।
ऐ इंसान, उसने तुझ पर नेकी ज़ाहिर कर दी है; ख़ुदावन्द तुझ से इसके सिवा क्या चाहता है कि तू इन्साफ़ करे और रहमदिली को 'अज़ीज़ रख्खे, और अपने ख़ुदा के सामने फ़रोतनी से चले?
और क़ाज़ियों से कहा, जो कुछ करो सोच समझकर करो, क्यूँकि तुम आदमियों की तरफ़ से नहीं, बल्कि ख़ुदावन्द की तरफ़ से 'अदालत करते हो; और वह फ़ैसले में तुम्हारे साथ है।
और ये जानते नहीं कि कल क्या होगा; ज़रा सुनो तो; तुम्हारी ज़िन्दगी चीज़ ही क्या है? बुख़ारात का सा हाल है अभी नज़र आए अभी ग़ायब हो गए।