Saúde
A saúde é uma bênção de Deus. A Bíblia ensina que Deus é nosso curador, que devemos cuidar do corpo como templo do Espírito e que a alegria do Senhor renova nossas forças.
Deus, o nosso curador
O Senhor é quem sara todas as nossas doenças. Ele prometeu abençoar o pão e a água e tirar as enfermidades do meio do seu povo.
तू अपने परमेश्वर यहोवा की आराधना करना, तब वह तेरे अन्न और जल पर आशिष देगा। मैं तेरे बीच में से रोग दूर करूँगा।
वह टूटे मनवालों को चंगा करता
और उनके घावों पर मरहम-पट्टी करता है।
बीमारों को स्वस्थ करो, मृतकों को जिलाओ, कोढ़ियों को शुद्ध करो, दुष्टात्माओं को निकालो; तुमने मुफ़्त में पाया, मुफ़्त में दो।
यह सुनकर यीशु ने कहा,"वैद्य की आवश्यकता स्वस्थ लोगों को नहीं बल्कि बीमारों को है।
O corpo como templo
Nosso corpo é templo do Espírito Santo. A Bíblia nos encoraja a cuidar da saúde física com disciplina e reverência a Deus.
क्या तुम यह नहीं जानते कि तुम्हारी देह पवित्र आत्मा का मंदिर है जो तुममें है, और परमेश्वर की ओर से तुम्हें मिला है? और तुम अपने नहीं हो, क्योंकि तुम मूल्य देकर खरीदे गए हो। इसलिए अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।
क्योंकि शारीरिक व्यायाम से थोड़ा ही लाभ होता है, परंतु भक्ति सब बातों में लाभदायक है, और इसमें वर्तमान और आने वाले जीवन की प्रतिज्ञा पाई जाती है।
हे प्रिय, मेरी प्रार्थना है कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही सब बातों में उन्नति करे और स्वस्थ रहे।
तू अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न बन;
यहोवा का भय मान,
और बुराई से दूर रह।
ऐसा करने से तेरा शरीर स्वस्थ रहेगा,
और तेरी हड्डियाँ पुष्ट रहेंगी।
A alegria que cura
O coração alegre é bom remédio. A esperança do coração traz alegria, e as palavras agradáveis são como favo de mel — doçura para a alma e saúde para o corpo.
आनंदित हृदय अच्छी औषधि है,
परंतु निराश मन हड्डियों को सुखा देता है।
मनभावने वचन शहद के छत्ते के समान होते हैं;
वे प्राण के लिए मीठे और देह को स्वस्थ करनेवाले होते हैं।
आशा में विलंब होने से मन उदास हो जाता है,
परंतु इच्छा की पूर्ति होना जीवन के
वृक्ष के समान है।
अपने मन से दुःख और अपनी देह से कष्ट को दूर कर, क्योंकि लड़कपन और जवानी दोनों क्षणभंगुर हैं।