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Sofrimento

Por Bíblia Online

O sofrimento é uma realidade da vida neste mundo, mas a Bíblia revela que Deus está presente em toda dor, produzindo caráter, esperança e redenção através das tribulações.

O sofrimento de Cristo

Jesus sofreu por nós, carregando nossas dores e enfermidades. Ele é o modelo supremo de como enfrentar o sofrimento com fé e obediência.

वह और मनों ा; वह ुःा, उसकन-पहची; और उससे। वह गया, और, हमनउसका। (मर. 9:12)

िचय उसनहमों सह िऔर हमुःों उठिा; हमनउसपरमवर ा-और दशें पड़ा समझा। (मत8:17, 1 पत. 2:24)

और उसककपड़े उतरकर उसपहना। और ाँों ूँथकर उसकिपर रखा; और उसकिें सरकणिऔर उसकआगटनककर उसउपहें उड़ालगे, "यहिों नमस!"

और इसिगए ोंि मसिुःउठकर, ें एक आदरगयि उसकपद-चिपर चलो।

ि ैं उसकऔर उसकनरमरो, और उसकुःों ें सहभमरूँ, और उसकसमनतकरूँ।

O propósito do sofrimento

Deus usa as tribulações para produzir perseverança, caráter e esperança. O sofrimento presente não se compara com a glória que será revelada.

वल यहनहीं, वरनहम ों ें घमणकरें, यहनकर ि रज, और रज खरिकलना, और खरिकलनआशउतपनै;

कषमहितक

ोंि ैं समझतूँ, ि इस समय ुःऔर उस महिमने, हम पर रगट ै, नहीं ैं।

ोंि हमपल भर हलकहमिबहमहतवपऔर अननमहिउतपनकरतै।

ोंि मसुः हमकअधिैं, हमि ें मसअधिसहभै।

ोंि मसरण पर यह अनरह ि वल उस पर िकरपर उसकिुःउठ,

बदलवन

इसलिजबकि मसशरें कर ुःउठउसमनसहथिसमरण करो, ोंि िसनशरें ुःउठा, वह गया,

Consolação e companhia

Deus consola os aflitos para que possamos consolar outros. Nunca estamos sozinhos no sofrimento — Ele é o Pai das misericórdias.

ि परमवर

हमरभमसपरमवर, और िधनयवो, दयिा, और सब रकि परमवर ै। वह हमसब ों ें ि ै; ि हम उस ि रण परमवर हमें ै, उनें ि सकें, िरकें ों।

एक सरउठ, और इस रकमसयवसकरो।

धरपर बहिपतिाँ पडैं,

परनयहउसकउन सबस

करतै। (ि. 24:16, 2 ु. 3:11)

अब परमवर अनरह ै, िसनें मसें अपनअननमहििा, ़ी तक ुःउठआप ें िऔर िऔर बलवनकर

यदि िकतरण ुःउठ, धनो; पर उनकडरमत डरो, और घबर,

Fé em meio à dor

Os grandes homens e mulheres de fé sofreram e perseveraram. O sofrimento nos aproxima de Deus e nos leva a entender seu coração.

तब अयउठा, और ़, िुँ़ाकर ि पर िऔर दणडवतकरककहा, (एज9:3, 1 पत. 5:6) "ैं अपनाँ िकलऔर वहीं ा; यहिऔर यहिा; यहधनै।" (सभो. 5:15)

", धनवह मन, िसक

परमवर ै;

इसलिसरवशकिमत

और अपनकरअपनकर: "उठा" एक वरिसकअभिै, ििकरनउसकयतकरनमसअनसरण ें अपमजनक ै। चलवह नहीं।

अपनबचै, वह उसएगा; और रण अपनै, वह उसएगा।

और अधअध: यहाँ अधमतलब ा, असपष, और ुःजगह, वरबह, जहाँ पर हमहमिदणिएगा। ें उसऩा ें पड़े अपनें उठ, और अबहम ें ा। और उसनरकर कहा, िअबहम, पर दयकरके, ि वह अपनगलिें िकर करे, ोंि ैं इस ें तडरहूँ।’

उसनझकनमबना, और िा, िवह मना, िऔर रखनते, वहझकिा; इसलिि वह झकिि मनवल नहीं िरहता, परनो-वचन यहुँमनवल नहीं .... वचन यहुँ: उनें यह िगई ि मनरकि षण नहीं, बलि उस रकि यम जनहपरमवर िरहतै। िकलतैं उन वह िरहतै। (मत4:4, 4:4, 1 ि. 10:3)

हमकमसअलग करा? , कट, उपदरव, अक, , ि, तलव?

और यदि ैं अपनसमसमपति ों िूँ, अपनजलिूँ, और रखूँ, नहीं।

परनपरमवर सहयतैं आज तक बनूँ और बड़े सभमनगवूँ, और उन ों नहीं कहता, भवियदवकऔर कहि ैं, ि मसुःउठा, और वहसबसपहलमरें उठकर, हमों ें और अनयजिों ें ि रचकरा।" (यशा. 42:6, यशा. 49:6)

सबसिरखो, और उस पविरतिसकिरभकदि (1 पत. 3:11, भज. 34:14)

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