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Atos 26

अगिसमपषकरण

1 अगिकहा, "अपनिषय ें लनअनमति ै।" तब बढ़ाकर उततर लगा,

2 "अगिा, ितनों यहपर लगैं, आज मनउनकउततर ें ैं अपनधनसमझतूँ, 3 िकरकइसलिि यहिों सब रथऔर िों नत26:3 यहूदियों के सब प्रथाओं और विवादों को जानता है: संस्कार, सभाओं, व्यवस्था, आदि सब कुछ मूसा के अनुष्ठान से सम्बंधित, आदिअतैं िनतकरतूँ, रज े।

4 "ल-चलन आरमअपनि और यरशलें ा, यह सब यहनतैं। 5 यदि गवहतैं, आरमपहचनतैं, ि ैं फरकर अपनधरसबसखरअनचला। 6 और अब उस रतिआशरण परमवर हमवजों ी, पर कददमचल रहै। 7 उसरतिआशलग, हमरहों अपनमन त-दिपरमवर करतआए ैं। ा, इसआशिषय ें यहपर लगैं। 8 जबकि परमवर मरि26:8 परमेश्वर मरे हुओं को जिलाता है: यह क्यों बेतुका माना जाना चाहिए कि परमेश्वर, जो सभी के निर्माता हैं, फिर से मनुष्य को जीवन में पुनर्स्थापित करना चाहिए।, यहाँ यह ों िनहीं समझी?

9 "ैंसमझि सरिें बहकरनि10 और ैंयरशलें ऐसिा; और रधजकों अधिकर बहपविों बनें ा, और जब े, ैं उनकिें अपनसममति ा। 11 और हर आरधनलय ें ैं उनें िा-िकर िकरवा, यहाँ तक ि ऐसगल गयि हर नगरों ें कर उनें सता।

12 "इसें जब ैं रधजकों अधिऔर आजपतकर दमिरहा; 13 ा, ें पहर समय ैंआकबढकर एक ि, अपनऔर अपनचलनों ों ओर चमकती। 14 और जब हम सब ि पर िपड़े, ैंइबें, झसकहतयह ी, ऊल, ऊल, ों सतै? पर रनिकठिै।’ 15 ैंकहा, रभु, ै?’ रभकहा, ैं ूँ, िसतै। 16 परनउठ, अपनाँों पर खड़ा ो; ोंि ैंइसलिदरशन िि उन ों वक और गवठहरँ, ैं, और उनकिनकिैं दरशन ूँा। (यहे. 2:1) 17 और ैं ों और अनयजिों बचरहूँा, िनकैं अब इसलिजतूँ। (1 इति. 16:35) 18 ि उनकें े, ि धकि ओर26:18 धकि ओर: िऔर ि और समपविरतें।, और अधिपरमवर ओर िें; ि ों षमा, और उन ों पर िकरनपवििगए ैं, िसत ँ।’ (यव. 33:3,4, यशा. 35:5,6, यशा. 42:7, यशा. 42:16, यशा. 61:1)

19 अतअगिा, ैंउस वरदरशन ी, 20 परनपहलदमिे, ियरशलरहनों ो, तब यहिें और अनयजिों समझरहा, ि मन िऔर परमवर ओर िरकर मन िकरो। 21 इन ों रण यहमनिें पकडकर लनयतकरते। 22 परनपरमवर सहयतैं आज तक बनूँ और बड़े सभमनगवूँ, और उन ों नहीं कहता, भवियदवकऔर कहि ैं, 23 ि मसुःउठा, और वहसबसपहलमरें उठकर, हमों ें और अनयजिों ें ि रचकरा।" (यशा. 42:6, यशा. 49:6)

24 जब वह इस ि उततर रहा, शबकहा, ", गल ै। बहिगल कर िै।" 25 परनउसनकहा, "महरत, ैं गल नहीं, परनसचऔर ि ें कहतूँ। 26 िसकमनैं िडर कर रहूँ, ें नतै, और िै, ि इन ों ें उससिनहीं, ोंि वह घटनें नहीं 27 अगिा, भवियदवकिकरतै? ाँ, ैं नतूँ, ि िकरतै।" 28 अब अगिकहा, "़े समझमसबनहतै?" 29 कहा, "परमवर थनयह ि ़े ें, बहें, वल नहीं, परनितनआज नतैं, इन बनधनों समँ।"

30 तब और यपऔर िरनऔर उनकठनउठ खड़े ; 31 और अलग कर आपस ें कहनलगे, "यह मनऐसनहीं करता, ु-दणबनें 26:31 ऐसा तो कुछ नहीं करता, .... योग्य हो: यह निष्कर्ष था जो यहूदियों के द्वारा उसके विरुद्ध लगाए गए आरोप को सुनने के बाद आया था।32 अगिकहा, "यदि यह मनसर ा, सकता।"

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