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भजन संहिता 111

परमवर सचऔर िि

1 यहि करो। ैं ों ें

और मणडलें सममन यहधनयवकरूँा।

2 यहबड़े ैं,

ितनउनसरसनरहतैं, उन पर लगैं। (भज. 143:5)

3 उसकभवशऔर ऐशवरयमय ैं,

और उसकधरसदतक बनरहा।

4 उसनअपनआशचरयकरों मरण करै;

यहअनरहकऔर दयवनै। (भज. 86:5)

5 उसनअपनडरवों आहिै;

वह अपनसदतक मरण रखा।

6 उसनअपनरजि-ि िे,

अपनों रति111:6 अपनों रतिै: उसकों रतउसकों ें ििमरयहाँ िरतऔर मरचरगई वह ििऔर कनिों िें यकमरै।

7 सचऔर उसकों ैं;

उसकसब उपदिसयैं,

8 सदसरवदअटल रहेंे,

सचऔर ििैं।

9 उसनअपनरजउदिै;

उसनअपनसदिठहरै।

उसकपविऔर भययै। (1:49,68)

10 ि यहभय ै;

ितनउसकआजनतैं,

उनकसमझ अचै।

उसकि सदबनरही।

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