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भजन संहिता 109

अभििि

रधबजिऊद भजन

1 परमवर ू, िसकैं ि करतूँ, रह!

2 ोंि और कपटमनों िुँै,

िषय ें लतैं।

3 उनोंवचनों ों ओर िै,

और यरझसलडैं। (. 15:25)

4 बदलें गलकरतैं,

परनैं थनें रहतूँ।

5 उनोंभलबदलें झस

और बदलझसिै।

6 उसकिअधिें रख,

और िउसकिओर खड़ा रहे।

7 जब उसकि, तब वह िकले,

और उसकथनि!

8 उसकि़े ों,

और उसकपद सरे! (ि. 1:20)

9 उसकबचअनँ,

और उसकिधव!

10 और उसकबचे-िें, और ाँकरे;

उनकअपनउजड़े घर कर कड़े ाँगनपड़े!

11 महजन लगकर, उसकसरवस109:11 महजन लगकर, उसकसरवसे: थनयह ै, ि वह ऐसपरिििों ें सकति उसकसमसमपदननों ों ें पड;

और परदउसककमें!

12 उस पर करकरतरहे,

और उसकअनलकों पर तरस !

13 उसक,

सऱी ें उसकि!

14 उसकितरों अधरयहमरण रहे,

और उसकिे!

15 वह िरनतर यहसमरहे,

वह उनकपर िे!

16 ोंि वह , करकरनगय

वरनऔर दरिसत

और लनइचिमनवों पड़ा रहता।

17 वह ि रखता, और उस पर पड़ा;

वह आशरसना,

इसलिआशउससरहा।

18 वह वससमपहनता,

और वह उसकें जल सम

और उसकहडिों ें सम109:18 उसकहडिों ें सम: ि उसकहडिों बह रहो, रभउसकसमशरें सम समगया।

19 वह उसकिओढे,

और ेंसमउसककमर ें िकसरहे।

20 यहओर ििों ो,

और िकहनों यहबदलिे!

21 परनयहरभु, अपनििझसबरकर;

करबड़ी ै, इसलिटके!

22 ोंि ैं और दरिूँ,

और दय यल 109:22 दय यल ै: ें हस ै, शकि रहै। ैं ें एक यल िसदूँ।

23 ैं ढलतसमरहूँ;

ैं िसमउड़ा िगयूँ।

24 उपवकरते-करतटनिबल गए;

और ें चररहनैं गयूँ।

25 उन ों मधरै;

जब खते, तब ििैं। (इबा. 10:12-13, 20:42-43)

26 परमवर यहा, सहयतकर!

अपनकरअनउदकर!

27 िससि यह ै,

और यहा, यह िै!

28 सतरहें, परनआशे!

उठतलजिों, परनआननिो! (1 ि. 4:12)

29 ििों अनदररवसपहन,

और अपनलजकमबल समओढ़ें!

30 ैं यहबहधनयवकरूँा,

और बहों ें उसकि करूँा।

31 ोंि वह दरििओर खड़ा रहा,

ि उसकणदणों बच

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