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भजन संहिता 58

अनिथन

रधबजिअल-तशहें ऊद ि

1 मनों, सचमिकतलतो?

और मनिों िकरतो?

2 नहीं, मन मन ें िकरतो;

भर ें उपदरव करतो।

3 जनमतपरैं,

िकलतलतभटक ैं।

4 उनमें सरिै;

उस समै, नननहीं हत58:4 उस समै, नननहीं हता: सरबहरउसिनहीं सकता, उसमनरमनहीं िसकता। ऐसरतै, ि वह नननहीं हतै।;

5 और सपितनिणतों पढ़े,

उसकनहीं नता।

6 परमवर, उनकुँें ाँों े;

यहा, उन जविंों ़ों उख!

7 लकर बहतसमँ;

जब अपनचढ़ाँ, तब कड़े ँ।

8 ोंसमलकर ै,

और िगरसमिसनरज नहीं।

9 इससपहलि ाँ़िों ें ाँों लगे,

हरजले, ों वह बवणडर उड़ा एगा।

10 परमवर ऐसपलटखकर आननिा;

वह अपनाँलहें एग58:10 वह अपनाँलहें एगा: यह पक जहाँ ितकों लहपर चलतै।

11 तब मनकहनलगेंे, िचय धरिफल ै;

िचय परमवर ै, पर करतै।

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