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भजन संहिता 21

रभउदें आनन

रधबजिऊद भजन

1 यहमरआननिा;

और िउदवह अति मगन ा।

2 उसकमनरथ िै,

और उसकुँिनतअसनहीं िा। (ा)

3 ोंि उततम आशें उससिलत

और उसकिपर दन पहनै।

4 उसनवन ाँा, और वनदिा;

उसकवन िै।

5 उदरण उसकमहिअधिै;

उसकभव और ऐशवरआभिकर ै।

6 ोंि उसकसरवदिआशिि21:6 उसकसरवदिआशििै: ियह ि उसनउसमनों ििआशरण बना। उसमनों िआशबनै। ;

अपनसमउसकहरऔर आननभर ै।

7 ोंि भरयहऊपर ै;

और परमपरधकरवह कभनहीं टलन21:7 वह कभनहीं टलना: वह ििएगा: अरउसकिंसन रहा।

8 सब शतूँिा,

िसब िों पतलगा।

9 अपनसमउनें जलतभट

समजलएगा।

यहअपनें उनें िगल एगा,

और आग उनकभसकर ी।

10 उनकफलों पर े,

और उनकमनों ें नषकरा।

11 ोंि उनोंि ै,

उनोंऐसि िि

कर सकेंे।

12 ोंि अपनधनउनकिचढ़ाएगा,

और िकर ेंे।

13 यहा, अपनमरें महो;

और हम कर पररम भजन े।

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