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भजन संहिता 85

कलिथन

रधबजिे: रहविों भजन

1 यहा, अपनपर रसन, आयै।

2 अपनरजअधरषमिै;

और उसकसब ों ाँिै। (ा)

3 अपनिै;

और अपनभडिै।

4 हमउदरकरपरमवर, हमकिकर,

और अपनहम पर कर85:4 अपनहम पर कर: अनतरिििि यदि ों िउसकरण एगऔर ि:सनवह एगा। !

5 हम पर सदिरहा?

़ी ़ी तक करतरहा?

6 हमकििएगा,

ि रजें आननकरे?

7 यहअपनकरहमें िा,

और हमउदकर

8 ैं लगरहूँि परमवर यहकहतै,

वह अपनरजउसकभकै, ि ें कहा;

परनिरकखतकरनलगें।

9 िचय उसकडरवों उदसमय िकट 85:9 िचय उसकडरवों उदसमय िकट ै: उदअरसब रकि, कटों े, खतरों े, आपदबच,

तब हमें महििा।

10 करऔर सचआपस ें िगई ैं;

धरऔर आपस ें बन िैं।

11 ें सचउगत

और वरधरकतै।

12 ाँ, यहउततम वसा,

और हमि अपनउपज ी।

13 धरउसकआगे-आगचला,

और उसकाँों िों हमिबनएगा।

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