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भजन संहिता 45

ि

रधबजिशनें रहविों मशि

1 दय एक दर िषय उम

उमडरहै,

ैंिषय रचउसक

ूँ; िखक खनबनै।

2 मनसनों ें परम दर ै;

ों ें अनरह भरै;

इसलिपरमवर सदिआश

ै। (4:22, इबा. 1:3,4)

3 , अपनतलवभव45:3 अपनतलवभव: अरऔर िजय ि- यहाँ मसएक िकहगयै।

और रतअपनकमर पर ाँ!

4 सतयता, नमरतऔर िकतििअपन

ऐशवरऔर रतपर सफलतसवो;

िभयनक ि!

5 ैं,

मनश-दिेंे;

शतदय उनसिेंे।

6 परमवर, िंसन सदसरवदबन

रहा;

जदणै।

7 िकति और टतरखै।

इस रण परमवर ाँ, परमवर

झकिों अधिहर

अभििै। (इबा. 1:8,9)

8 वसगनधरस, अगर, और

गनिैं,

ाँमनिों ें रवों

रण आननिै।

9 रतिििों ें जकिाँ ैं;

िओर पटरी, ओपदन

ििखड़ी ै।

10 जक, और लगकर े;

अपनों और अपनिघर ा;

11 और करा।

ोंि वह रभै, उसदणडवतकर

12 जकेंकरनि

उपसिी,

रजधनवरसनकरन

यतकरेंे।

13 जकमहल ें अति यमै,

उसकवसें नहलकढ़े ैं;

14 वह वसपहन

पहुँएगी।

िाँ उसकसहिाँ ैं,

उसके-चलतपहुँी।

15 आननिऔर मगन कर पहुँ45:15 आननिऔर मगन कर पहुँी: हन बजऔर िकल आएे। आननऔर उतसव ा। ,

और महल ें रवकरेंी।

16 ितरों पर सनोंे;

िनकपर िठहरएगा।

17 ैं ऐसकरूँा, ि चऱी

़ी तक रही;

इस रण श-दसदसरवद

धनयवकरतरहेंे।

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