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भजन संहिता 76

जयवनपरमवर

रधबजिे: रवों , आसभजन,

1 परमवर यहें गयै,

उसकइसएल ें महै।

2 और उसकमणडप ें,

और उसकिें ै।

3 वहाँ उसनों ो,

, तलवऔर अनहथिों ा। (ा)

4 परमवर, िमय ै:

अहभरपह़ों अधिउततम और महै।

5 मनवगए, और ींें पड़े ैं;

और रवों ें िचला।

6 परमवर, े,

रथों सम़े ींें पड़े ैं।

7 वल भययै;

और जब करनलगे, तब मनखड़ा रह सका?

8 वरिणय ै;

उस समय नकर डर गई, और रही,

9 जब परमवर करन,

और सब नमों उदकरनउठ76:9 जब परमवर करन.... उठा: अरजब वह अपनरजशतउखेंकनऔर नषकरनआयइस भजन ें यकै।(ा)

10 िचय मनजलजलहट ि रण एगी,

और जलजलहट रह , उसका।

11 अपनपरमवर यहमननत ो, और करो;

वह भय 76:11 वह भय ै: यह भय उतपनकरनिनहीं ि ेंचढ़ापरनइसलिचढ़ाि उसनरगट कर िि वहभय और रदै। , उसकआस-पसब उसकिेंआएँ।

12 वह रधों अभििा;

वह भययपडै।

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