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भजन संहिता 110

मससनकषण

ऊद भजन

1 रभयहयह ै, "िओर ,

जब तक ि ैं शतचरणों कर ूँ।" (इबा. 10:12,13, 20:42,43)

2 पररम जदणयहिबढ़ाएगा।

अपनशतें सन कर

3 रजपररम िबलि बनतैं;

जवपविरतयम,

और गरजनओस समैं।

4 यहशपथ और पछतएगा,

"मलिििदक ि पर सरवदजक 110:4 मलिििदक ि पर सरवदजक ै: अरवह मलिििदक समिवह ििा।" (इबा. 7:21, इबा. 7:17)

5 रभिओर कर

अपनिकर ा। (भज. 143:5)

6 वह ि-ि ें एगा, रणभि शवों भर एगी;

वह लम़े ों रधों रकर

7 वह ें चलतनदजल एग

और तब वह िजय अपनिकरा।

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