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भजन संहिता 14

िों एक ि

रधबजिऊद भजन

1 14:1 : धरमशें कहगयखतअनिततै। अपनमन ें कहै, "परमवर नहीं।"

िगडगए, उनोंििैं,

करनहीं।

2 यहवरें मनों पर ि

ि ि ि,

यहनहीं।

3 सब सब भटक गए, सब रषगए;

करनहीं, एक नहीं। (. 3:10,11)

4 िअनरथकनहीं रहता,

ों ऐसैं ी,

और यहनहीं े?

5 वहाँ उन पर भय गया,

ोंि परमवर धरों ें िरनतर रहतै।

6 ि उड़ा

परनयहउसकशरणसै।

7 भलि इसएल उदि14:7 िे: उसयहाँ परमवर िस-सगयै, जहाँ वह आजऔर जहाँ वह अपनमरििकरतै। रगट ा!

जब यहअपनरजसतआएगा,

तब मगन और इसएल आननिा। (भज. 53:6, 1:69)

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