Pular para o conteúdo
Publicidade

भजन संहिता 98

उदऔर िि

भजन

1 यहिएक नय,

ोंि उसनआश्‍चरयकरिैं!

उसकिऔर पविउसकिउदिै!

2 यहअपनिउदरकििा,

उसनअनयजिों ि ें अपनधररगट िै।

3 उसनइसएल घरपर अपनकर

और सचि ी,

और सब र-दों हमपरमवर िउदै। (1:54, ि. 28:28)

4 98:4 ी: यह घटनइतनमहतवपि सब िाँ उतसव मनँ। यह िववउलएवआननिषय ै। ों, यहजयजयककरो;

उतहपवक जयजयककरो, और भजन ! (यशा. 44:23)

5 बजकर यहभजन ,

बजकर भजन वर

6 रहिां और नरसिंूँूँककर

यहजयजयककरो।

7 समऔर उसमें सब वसगरज उठें;

जगत और उसकिमहशबकरें!

8 नदिाँ िाँ बजँ;

पहिलकर जयजयककरें।

9 यह यहमनो, ोंि वह करनआनै।

वह धरजगत ा,

और सचश-दों करा। (ि. 17:31)

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.

Veja também