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भजन संहिता 52

अनऔर धरि

रधबजिमशपर ऊद भजन जब एग एदऊल बति ऊद अहघर गय

1 , करनपर ों घमणकरतै?

परमवर करअननै।

2 वल टतगढ52:2 वल टतगढै: कहनअरि वह मनअपनमनों िकरतै। ;

धरउसतरसमवह छल

करतै।

3 भलबढकर ें,

और िकतबढकर ि रखतै। (ा)

4 छल,

सब िकरनों रसनरहतै।

5 िचय परमवर सदिकर ा;

वह पकडकर िा;

और िों उखा। (ा)

6 तब धरइस घटनखकर डर े,

और यह कहकर उस पर ेंे,

7 "ो, यह वहिसनपरमवर

अपनशरण नहीं ा,

परनअपनधन बहयत पर भररखता,

और अपनटतें करतरहा!"

8 परनैं परमवर भवन ें हर

समूँ52:8 ैं परमवर भवन ें हरसमूँ: इस रकपविरसगन ें लगगयपविोंि वह परमवर रकअधै।

ैंपरमवर करपर सदसरवद

िभररखै।

9 ैं धनयवसरवदकरतरहूँा, ोंि

यह िै।

ैं पर आशरखतूँ, ोंि

यह पविभकों मनउततम ै।

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