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भजन संहिता 131

परमवर ें िवतभर

ऊद

1 यहा, मन गर

और ि घमणभरै;

और ें बड़ी और िअधिकठिैं,

उनसैं नहीं रखता।

2 िचय ैंअपनमन और कर िै,

़ाबचअपनाँ ें रहतै,

़ाबचसममन रहत131:2 ़ाबचअपनाँ ें रहतै, ़ाबचसममन रहतै: कहनअरि वह िनमै, उसनअपनवनििकर िउसमें आकांीं उसनउनें दबिै।

3 इसएल, अब कर सदसरवदयहपर आशलगरह!

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