10 जिस ताहीं थम किसे बाबत माफ करो सो, उस ताहीं मै भी माफ करुँ सूं, क्यूँके जिस बात के बारें मन्नै उस ताहीं माफ करया सै, जै वो सच म्ह माफी लायक था, तो मन्नै मसीह ताहीं हाजिर जाणकै उस ताहीं थारे खात्तर माफ करया सै। 11 ताके शैतान का म्हारै पै दाँव ना चाल्लै। क्यूँके हम उसके बुरे इराद्यां तै अनजाण कोनी।
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