15 यो जाण ल्यो के, क्यूँ म्हारा प्रभु धीरजवान सै? क्यूँके वो माणसां नै कुछ और बखत देणा चाहवै सै, ताके वो पाप करणा छोड़ दे, अर वो उन ताहीं बचा सकै, जिब म्हारा संगी बिश्वासी भाई पौलुस जिसतै हम प्यार करां सां, उसनै परमेसवर के ज्ञान के जरिये थारे ताहीं लिख्या सै, उसनै भी थारे ताहीं येए बात बताई सै, जो मन्नै थारे ताहीं बताई सै। 16 उस्से तरियां ए उसनै अपणी सारी चिट्ठियाँ म्ह भी जो बिश्वासियाँ ताहीं लिखी सै इन बात्तां का जिक्र करया सै, जिन म्ह कुछ बात इसी सै जिनका समझणा ओक्खा सै, अर अनपढ़ अर चंचल माणस उनके मतलबां नै गलत तरिक्कें तै बतावै सै जिसा वो पवित्र ग्रन्थ की दुसरे वचनां का गलत मतलब लिकाड़ै सै, इसा करकै वो परमेसवर नै मजबूर करै ताके वो उन ताहीं नाश करदे।
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