1 उसनै मेरे ताहीं कह्या, "हे माणस की सन्तान, अपणे पैरां कै बळ खड्या हो, अर मै तेरै तै बात करुँगा।" 2 जिस तरियां ए उसनै मेरे ताहीं यो कह्या, उस तरियां ए परमेसवर का आत्मा मेरे म्ह समाकै मेरे ताहीं पैरां कै बळ खड़या कर दिया; अर जो मेरे तै बात करै था मन्नै उसकी सुणी। 3 उसनै मेरे तै कह्या, "हे माणस की सन्तान, मै तेरे ताहीं इस्राएलियाँ कै धोरै यानिके धोक्खा करण आळी जात्ति कै धोरै भेज्जू सूं, जिननै मेरे खिलाफ धोक्खा करया सै; उनके पुरखा अर वे भी आज कै दिन ताहीं मेरै खिलाफ अपराध करदे चाल्दे आये सै। 4 इस पीढ़ी के माणस जिनके धोरै मै तेरे ताहीं भेज्जू सूं, वे बेशर्म अर ढीठ सैं; 5 अर तू उनतै कहिये, ‘प्रभु यहोवा न्यू कहवै सै,’ इसतै वे, जो धोक्खा देण आळे घरान्ने के सैं, चाहे वे सुणै या ना सुणै, फेर भी वे इतणा जाण लेवैंगे के म्हारे बीच एक नबी प्रगट होया सै। 6 हे माणस की सन्तान, तू उनतै ना डरिये; चाहे तेरे ताहीं काण्डयाँ, ऊँटकटारयां अर बिच्छुआं कै बीच भी रहणा पड़ै, तोभी उनके वचनां तै ना डरिये; भले ए वे बिद्रोही घरान्ने के सैं, तोभी ना तो उनके वचनां तै डरिये, अर ना उनके मुँह देखकै तेरा मन कच्चा हो। 7 इसनै चाहे वे सुणै या ना सुणै; फेर भी तू मेरे वचन उनतै कहिये, वे तो बड़े बिद्रोही सैं।"
8 "पर हे माणस की सन्तान, जो मै तेरै तै कहूँ सूं, उसनै तू सुण ले, उस बिद्रोही घरान्ने की तरियां तू भी बिद्रोही न्ही बणना जो मै तन्नै देऊँ सूं, उसनै मुँह खोलकै खा ले।" 9 फेर मन्नै नजर करी अर के देख्या, के मेरी ओड़ एक हाथ बढ्या होया सै अर उस म्ह एक किताब सै। 10 उस ताहीं यहोवा नै मेरै स्याम्ही खोलकै फैलाया, अर वो दोन्नु ओड़ लिखी होई थी; अर जो उस म्ह लिख्या था, वे विलाप अर शोक अर दुःख भरे वचन थे।