1 ओबद्याह का दर्शन। एदोम कै बारै म्ह यहोवा न्यू कहवै सै: हम लोग्गां नै यहोवा की और तै खबर सुणी सै, अर एक दूत गैर जातियाँ म्ह न्यू कहण नै भेज्या गया सै: 2 "उठो! हम उसतै लड़ण नै उठ्ठां!" मै तेरे ताहीं जात्तां म्ह छोट्टा कर दियुँगा, तू घणा निकम्मा गिण्या जावैगा। 3 हे पहाड़ां की दरारां म्ह बसण आळे, हे ऊँच्ची जगहां म्ह रहण आळे, तेरे घमण्ड नै तेरे ताहीं धोखा दिया सै; तू मन म्ह कहवै सै, "कौण मेरे ताहीं धरती पै उतार देवैगा?" 4 फेर भी चाहे तू उकाब की तरियां ऊँच्चा उडदा हो, बलके तारागण कै बीच अपणा घोंसला बणाए हो, फेर भी मै तन्नै ओड़ै तै नीच्चै गिराऊँगा, यहोवा की याए वाणी सै।
5 जै चोर डाकू रात नै तेरे धोरै आन्दे, (हाय, तू किस तरियां मिटा दिया गया सै!) तो के वे चुराए होए धन तै छिक कै चले ना जान्दे? अर जै दाख के तोड़ण आळे तेरे धोरै आन्दे, तो के वे कित्ते-कित्ते दाख न्ही छोड़ जान्दे? 6 पर एसाव का धन किस तरियां टोह कै लूट्या गया सै, उसका गुप्त धन किस तरियां पता लगा-लगाकै लिकाड़या गया सै!
7 जितन्या नै तेरै तै करार करया था, उन सारया नै तेरे ताहीं हद तक धकेल दिया सै; जो माणस तेरै तै मेल राक्खैं थे, वे तेरे ताहीं धोखा देकै तेरै पै हावी होए सैं; वे तेरी रोट्टी खावै सैं, वे तेरै खात्तर फंदा लगावै सै उस म्ह कुछ समझ न्ही सै। 8 यहोवा की या वाणी सै, के मै उस बखत एदोम म्ह तै बुद्धिमानां नै, अर एसाव के पहाड़ म्ह तै चलाकी नै नाश न्ही करुँगा?
9 अर हे तेमान, तेरे शूरवीरां का मन कच्चा हो जावैगा, अर एसाव के पहाड़ पै का हर एक माणस घात होकै नाश हो जावैगा।
10 हे एसाव, एक उड़दंग कै कारण जो तन्नै अपणे भाई याकूब पै करया, तू शर्म तै ढकैगा; अर सदा कै खात्तर नाश हो जावैगा। 11 जिस दिन परदेशी माणस उसकी जायदाद खोसकै लेगे, अर पराए माणसां नै उसके फाटकां तै घुसकै यरुशलेम पै चिट्ठी गेरी, उस दिन तू भी उन म्ह तै एक था। 12 पर तन्नै ठीक न्ही था के तू अपणे भाई कै दिन म्ह, यानिके उसकी विपत्ति कै दिन म्ह उसकी और देखदा रहन्दा, अर यहूदियाँ के विनाश के दिन उनके उप्पर खुश होन्दा, अर उनके संकट के दिन बड़ा बोल बोल्दा। 13 तेरे ताहीं ठीक न्ही था के मेरी प्रजा की मुसीबत के दिन तू उसके फाटक म्ह बड़दा, अर उसकी मुसीबत के दिन उसकी बुरी हालत नै देखदा रहन्दा, अर उसकी मुसीबत के दिन उसकी जायदाद पै हाथ लगान्दा। 14 तेरे ताहीं सही न्ही था के चौराहयाँ पै उसके भाजण आळे नै मार गेरण कै खात्तर खड्या होन्दा, अर संकट के दिन उसके बचे होया नै पकड़दा।
15 क्यूँके सारी जातियाँ पै यहोवा के दिन का आणा नजदिक सै), सारी जातियाँ कै खात्तर सजा सै जिस दिन प्रभु उनका न्याय करैगा।। जिसा तन्नै करया सै, उसाए, तेरै तै भी करया जावैगा, तेरा बरताव बोहड़कै तेरे ए सिर पै पड़ैगा।
16 जिस तरियां तन्नै मेरे पवित्र पर्वत पै पिया, उसे तरियां तै सारी जातियाँ लगातार पीन्दी रहवैंगी, वे पीवैंगे अर वे निगळ जावैंगे, अर इसी हो जावैंगी जिसी कदे होई ए न्ही।
17 पर उस बखत सिय्योन पर्वत पै बचे होए माणस रहवैंगे, अर वो पवित्रस्थान ठहरैगा; अर याकूब का घरान्नां अपणे खास हिस्यां का अधिकारी होगा। 18 फेर याकूब का घरान्नां आग, अर यूसुफ का घराना लौ, अर एसाव का घरान्नां खूँटी बणैगा; अर वे उन म्ह आग लगाकै उननै भस्म करैंगे, अर एसाव के घरान्ने का कोए न्ही बचैगा; क्यूँके यहोवा ए नै इसा कह्या सै।
19 दक्षिण देश के माणस एसाव के पहाड़ के अधिकारी हो जावैंगे, अर नीच्चै के देश के माणस पलिश्तियाँ के अधिकारी होवैंगें; अर यहूदी, एप्रैम अर सामरिया के देश नै अपणे हिस्से म्ह कर लेंगे, अर बिन्यामीन गिलाद का अधिकारी होगा। 20 इस्राएलियाँ के उस दल म्ह तै जो माणस गुलाम्मी म्ह जाकै कनानियाँ के बीच सारफत ताहीं रहवै सैं, अर यरुशलेमियाँ म्ह तै जो माणस गुलाम्मी म्ह जाकै सपाराद म्ह रहवै सैं, वो सारे दक्षिण देश के नगरां के अधिकारी हो जावैंगे। 21 उद्धार करण आळे एसाव के पहाड़ का न्याय करण कै खात्तर सिय्योन पर्वत पै चढ़ आवैंगे, अर राज्य यहोवा ए का हो जावैगा।