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यहेजकेल 31

िअर अशपतन

1 रहवें सरमहि्‍हलियहवचन हच2 "णस सन, ििअर उसककह, अपणबड़ािसकतरिां ै। 3 , अशलबएक वदिसकदर-सदर ी, घणअर बड़ी ्‍ी, अर उसकुंगळ दळां ीं हची। 4 उस ीं बढ़ाा, उस ुंरण ्‍ा, िसतनदिाँ उसकजगहां ांओडबहवी, अर उसकिाँ िकडदरखतां हची। 5 इस रण उसकदरखतां घण; उसक, अर उसकटहाँ ी, ूँििकड़ी, उननघणिा। 6 उसकिाँ अकपकबसकरैं े, अर उसकटहाँ ्‍तरिां व-जनजने; अर उसकबड़ी रहवी। 7 अपणबड़ाअर अपणिाँ लमरण दर ा; ूँउसकजडघणी। 8 परमसवर वदउस ीं िसके, सनवर उसकिाँ तरिां े, अर अरदरखत उसकटहाँ यक े; परमसवर दरखत दरतउसकबरबर ा। 9 मन्‍उस ीं िाँ बहयत दर बणा, उरीं अदन दरखत परमसवर े, उसतकरे।"

10 "इस करकपरमसवर यहकहै, उसकबढी, अर उसकुंगळ दळां ीं हचै, अर अपणरण उसकमन उठै, 11 इस करकां कतवर ै, उसउसनकर ा, अर पक्‍उसतयवहकरा। उसकरण मन्‍उस ीं ििै। 12 परदी, ां भयनक णस ैं, उस ीं टकैंे, उसकपह़ां ै, अर तरइयां िैंी, अर उसकटहाँ ळयां पड़ी रहवैंी, अर ि-ि णस उसकचलैंे। 13 उस िदरखत अकपकबसकरैं, अर उसकटहाँ उपपर व-जनचढैं। 14 इस करकदरखतां अपणबढ़ाै, अपणुंगळ दळां ीं हचै, अर उन ितनमजबैं ्‍रण िै; ूँकबगड़े णसां तरिां बस करकअधिैंे।"

15 "परमसवर यहकहवै: ििअधउतर ा, उस िमन्‍िकरअर ुंसमदर ीं ाँि31:15 ढुंघे समुन्दर ताहीं ढाँप दिया अश्शूर देश की समृद्धि का सोता ढुंघा समुन्दर था, वो विलाप कै खात्तर मजबूर होया, पाणी देण की खुश समृद्धि देण की उम्मीद सूखगी।, अर नदिाँ घणा; अर उसकरण मन्‍लबउदी, अर दरखत ि16 िमन्‍उस ीं कबगड़े अधेंिा, उसकिरण शबि-ि थरथरी, अर अदन दरखत िलबबढ़िा-बढ़िदरखतां ै, ितनउसतैं, उन रयअधि 17 उसकतलवअधउतरगे; िउसकांे, अर त-जिउसकरहवे।"

18 "इस करकमहिअर बड़ाअदन दरखतां िसकतरिां ै? अदन और दरखतां अधउतरया, अर खतनरहिणसां तलवपडरहवा। िअपणसमइसा, परमसवर यहै।"

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