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प्रकाशितवाक्य 10

गदअर ि

1 मन्‍एक और शकिगदीं उतरदा, िसनदळां ीं लतां समरण करया, उसकिघ-धना, अर उसकुँरज िअर उसकाँ आग खमबरगे। 2 उसनअपणाँ समदर ै, अर ओळाँ धरतधरया, अर उसकएक िी,। 3 अर इतणि्‍ा, िगरजै, अर िि्‍गरजण शबि, िननसमझ ा। 4 अर िगरजण शबि, िखण ा, अर मन्‍शबा, गरजण उन शबां ै, उनन, अर िा। 5 अर िगदीं मन्‍समदर अर धरतखड़े ा, उसनअपणकसम तर ा। 6 अर िरहवा, अर िसनअर उस बसिां ीं, अर धरतअर उस बसिां ीं, अर समदर उस बसिां ीं बणै, उसकसम ा, "इब और ी।"

7 ितमगदरहूं्‍कण बखत ा, परमसवर जनी, िीं उसनअपणनबिाँ ीं बता, उसककरै, पर जनसरणसां िकरी। 8 अर िशबकरण आळीं मन्‍लदा, करण ा, ा, गदसमदर अर धरतखडै, उसकिे। 9 अर मन्‍गदकहा, "िमन्‍े, अर उसनकहा, इसने,’ ुँशहद ििी, पर कडकर ी।" 10 ांिउस गदा, ुँशहद ििी, पर िउसना, कडा। 11 कहगया, "तन्‍घणणसां, ां, अर जयां ें भवियवकरणी।"

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