18 अर उसकी चारदीवारी म्ह पन्ने जड़े थे, अर नगर इसे शुद्ध सोन्ने का था, जो कती शीशे बरगा साफ था। 19 अर उस नगर की नीम हरेक ढाळ के घणे महँगे पत्थरां तै सजाई होड़ थी, पैहल्ड़ी नीम पन्ने की थी, दुसरी नीलमणि की, तीसरी लालड़ी की, चौथी मरकत की। 20 पाँचमी गोमेदक की, छटी माणिक्य की, सातमी पीतमणि की, आठमी पेरोज की, नौम्मी पुखराज की, दसमी लहसनिए की, ग्यारमी धूम्रकान्त की, बाहरमी याकूत की। 21 अर बारहों फाटक, बारहा मोतियाँ के थे, एक-एक फाटक, एक-एक मोत्ती का बण्या होड़ था, अर नगर की सड़क साफ-सुथरे काँच कै जिसे शुद्ध सोन्ने की थी।
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