जीवन-जल की नदी
1 फेर सुर्गदूत नै मेरै ताहीं पाणी दिखाया जो जीवन देण आळा पाणी कहलावै सै, अर वो पाणी शीशे की तरियां साफ था, अर उसका चोवां परमेसवर का सिंहासन सै, जो के मेम्ने का भी सिंहासन सै। 2 वो नदी नगर के बीचों बीच सड़क कै बिचाळै बहवै थी। अर नदी कै इस पार, अर उस पार, उसके दोन्नु किनारां पै जीवन का दरखत था, जो जीवन देवै सै, उस म्ह बारहा ढाळ के फळ लाग्गै थे, अर वो हरेक महिन्ने फळ ल्यावै था, अर उस दरखत के पत्त्यां तै हरेक देश के माणस चंगे होवै थे।