मोहरबन्द किताब अर मेम्ना
1 अर जो सिंहासन पै बेठ्या था, मन्नै उसकै सोळे हाथ म्ह एक किताब देक्खी, जो भीत्त्तर अर बाहरणै लिक्खी होड़ अर वा सात मोहर लाकै बन्द करी गई थी। 2 फेर मन्नै एक शक्तिशाली सुर्गदूत ताहीं देख्या, जो जोर तै बोलण लागरया था, के इस किताब कै खोलण अर उसकी मोहर तोड़ण कै जोग्गा कौण सै? 3 पर ना सुर्ग म्ह, ना धरती पै, ना धरती कै तळै कोए उस किताब नै खोलण या उस ताहीं पढ़ण लायक कोए कोनी लिकड़या। 4 अर मै फूट-फूटकै रोण लाग्या, क्यूँके उस किताब ताहीं खोलण, या उस ताहीं पढ़ण लायक कोए न्ही मिल्या। 5 फेर उन बुजुर्गां म्ह तै एक नै मेरै तै कह्या, मतना रोवै, लखा, यहूदा कै गोत्र का वो शेर, जो दाऊद का मूल सै, उस किताब नै खोलण अर उसकी सात्तु मोहर तोड़ण कै खात्तर जयवन्त होया सै। 6 फेर मन्नै उस सिंहासन अर च्यांरु प्राणियाँ अर उन बुजुर्गां कै बिच्चाळै, मान्नो एक मारया होड़ मेम्ना खड्या देख्या जो पैहले मर ग्या था, पर इब वो जिन्दा होग्या सै, उसकै सात सींग अर सात आँख थी, ये परमेसवर की सात्तु आत्मा सै, जो साब्ती धरती पै भेज्जी गई सै।