4 मन्नै उनकै धोरै तै आग्गै बढ़े होए थोड़ी-ए देर होई थी,
के मेरा प्राणप्रिय मन्नै मिलग्या।
मन्नै उस ताहीं पकड़ लिया, अर उस ताहीं जाण न्ही दिया
जिब तक उस ताहीं अपणी माँ के घर यानी अपणी जाम्मण आळी की कोठड़ी म्ह ना ले आई।
4 मन्नै उनकै धोरै तै आग्गै बढ़े होए थोड़ी-ए देर होई थी,
के मेरा प्राणप्रिय मन्नै मिलग्या।
मन्नै उस ताहीं पकड़ लिया, अर उस ताहीं जाण न्ही दिया
जिब तक उस ताहीं अपणी माँ के घर यानी अपणी जाम्मण आळी की कोठड़ी म्ह ना ले आई।