13 फेर मन्नै देख्या के चाँदणा अँधेरे तै बढ़िया सै, उतणी बुद्धि भी बेकूफी तै बढ़िया सै। 14 जो बुद्धिमान सै, उसके सिर म्ह आँख होवै सै, पर बेकूफ अँधेरे म्ह चाल्लै सै; फेर भी मन्नै जाण लिया के दोनुवां की हालत एक जिसी होवै सै। 15 फेर मन्नै मन म्ह कह्या, "जिसी बेकूफ की हालत होवैगी, उसीए मेरी भी होवैगी; फेर मै क्यूँ घणा बुद्धिमान होया?" अर मन्नै मन म्ह कह्या, यो भी बेकार ए सै। 16 क्यूँके ना तो बुद्धिमान की अर ना मूर्ख की यादगारी सदा बणी रहवैगी, पर आण आळे बखत म्ह सारा किमे भूला दिया जावैगा। बुद्धिमान किस तरियां मूर्ख की ढाळ मरै सै!
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