Pular para o conteúdo
Publicidade

सभोपदेशक 4

1 मन्‍रज ्‍ै। अर ा, सहण आळयां बहण गरै, अर उन ीं ि आळी! करण आळयां कत ी, पर उन ीं ि आळा। 2 इस करकमन्‍मरां ीं मरगें ै, उन िदयां इब तक िघणधनकहा; 3 बलउन ां घणआचइब ीं ा, रज ्‍ै।

मतलबहनत

4 मन्‍हनत अर सफल ां ीं अपणपड़ोजळण रण करै। अर हवपकडिै।

5 धररहवअर ्‍िकरअपणआप खतम कर4:5 अपणा ए माँस खावै सै

6 एक उन िाँ आचै, िनकहनत अर हवपकडो।

7 मन्‍रज ्‍ी। 8 एकरहवअर उसकै; उसकै, ै, उसकहनत अना; उसकधन िकदी, अर कहवै, िसकतर हनत करुँ अर अपणिदगूँ ूं? अर कतभरयै।

ितर

9 एक भलै, ूँउनकहनत आचफळ िै। 10 ूँउन एक िै, सरउस ा; पर उसपएकिअर उसकिो। 11 जणकठगरम रहवैंे, पर एकितरिां गरम सकै? 12 एको, पर उसकबलकर सकें। घयां बटटदी।

मशह

13 िजवगरइस़े अर घणबढ़िसला, 14 उसकगरो, िकडबणो। 15 मन्‍िदयां ीं रज ्‍्‍ै-िउस बणआळजविउनकजगहां तर खडा। 16 णस अनगिणत िनपरधा। आण आळबखत नई ़ी णस उसकरण ैंे। े-शक अर हवपकडै।

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.

Veja também