1 फेर मन्नै वो सारा अंधेर देख्या जो सूरज कै नीच्चै होवै सै। अर के देख्या, के अंधेर सहण आळयां के आँसू बहण लागरे सै, अर उन ताहीं कोए शान्ति देण आळा कोनी! अंधेर करण आळयां के हाथ म्ह ताकत थी, पर उन ताहीं कोए शान्ति देण आळा न्ही था। 2 इस करकै मन्नै मरे होयां ताहीं जो मरगें सै, उन जिन्दयां तै जो इब तक जिन्दा सै घणा धन्य कह्या; 3 बल्के उन दोनुवां तै घणा आच्छा वो सै जो इब ताहीं पैदा ए न्ही होया, ना ये बुरे काम देक्खे जो सूरज कै नीच्चै होवै सै।
4 फेर मन्नै सारे मेहनत के काम अर सारे सफल काम्मां ताहीं देख्या जो लोग अपणे पड़ोसी तै जळण कै कारण करै सै। यो भी बेकार अर हवा नै पकड़ण के जिसा सै।
5 बेकूफ छात्ती पै हाथ धरे रहवै अर मान्नो बिना काम करे अपणे आप नै खतम करै सै।
6 चैन की गैल एक मुट्ठी उन दो मुट्ठियाँ तै आच्छी सै, जिनकी गैल मेहनत अर हवा नै पकड़णा हो।
7 फेर मन्नै सूरज कै नीच्चै यो भी बेकार बात देक्खी। 8 कोए एक्ला रहवै अर उसका कोए न्ही सै; ना उसका बेट्टा सै, ना भाई सै, फेर भी उसकी मेहनत का अन्त न्ही होन्दा; ना उसकी आँख धन तै छिकदी, अर ना वो कहवै सै, मै किसकी खात्तर मेहनत करुँ अर अपणी जिन्दगी नै दुखी राक्खूँ सूं? यो भी बेकार अर कती दुख भरया काम सै।
9 एक तै दो भले सै, क्यूँके उनकी मेहनत का आच्छा फळ मिलै सै। 10 क्यूँके जै उन म्ह तै एक गिरै, तो दूसरा उस नै ठावैगा; पर हाय उसपै जो एक्ला होकै गिरै अर उसका कोए ठाणिया ना हो। 11 फेर जै दो जणे कठ्ठे सोवै तो वे गरम रहवैंगे, पर कोए एक्ला किस तरियां गरम हो सकै सै? 12 जै कोए एक्ले पै हावी हो तो हो, पर दो उसका मुकाबला कर सकैगें। जो डोरी तीन ताघयां तै बटी हो तो वो ताव्ळी न्ही टूटदी।
13 बुद्धिमान जवान गरीब होण पै भी इसे बूढ़े अर बेकूफ राजा तै घणा बढ़िया सै जो सलाह न्ही लेन्दा, 14 चाहे वो उसके राज्य म्ह गरीब पैदा होया हो, या जेळ म्ह तै लिकड़कै राजा बण्या हो। 15 मन्नै सारे जिन्दयां ताहीं जो सूरज कै नीच्चै चाल्लै-फिरै सै देख्या के वे उस राजा बणाण आळे जवान कै गैल हो लिये सै जो उनकी जगहां लेण की खात्तर खड्या होया। 16 वे सारे माणस अनगिणत थे जिनपै वो प्रधान होया था। फेर भी आण आळे बखत म्ह नई पीढ़ी के माणस उसके कारण खुश न्ही होवैंगे। बे-शक यो भी बेकार अर हवा नै पकड़णा सै।