5 क्यूँके जिन्दे माणस तो इतणा जाणै सै के वे मरैगें, पर मरे होए कुछ भी न्ही जाणदे, अर ना उन ताहीं कुछ और बदला मिल सकै सै, क्यूँके उनकी याद मिट ग्यी सै। 6 उनका प्यार अर उनका बैर अर उनकी जळण नाश हो ली, अर इब जो कुछ सूरज कै नीच्चै करया जावै सै उस म्ह सदा कै खात्तर उनका और कोए हिस्सा न्ही होवैगा।
10 जो काम तन्नै मिलै उस ताहीं अपणा मन लगाकै करिये, क्यूँके अधोलोक म्ह जित्त तू जाण आळा सै, ना काम ना योजना ना ज्ञान अर ना बुद्धि सै।