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Joel 1

1 यहवचन पतएल एल हचा, ै:

ििाँ जरिि

2 रणिों, ो, सब रहण आळो, लगो! इसिां , रखां िां कदै? 3 अपणळकां इसकबखकरअर अपणळकां ै, अर उनकळक आणआऴी णसां ै।

4 ििबचा; उसनअरििा। अर िअरिबचा, उसनििा, अर ििबचा, उस ीं ििै। 5 मतवो, उठ1:5 हे मतवाळेयो, जाग उठो पापां कै कारण पापी मूर्ख बण जावै सै यो सब विवेक नै बेकार बणा देवै सै, आत्मा नै आन्धा कर देवै सै अर अपणी ए बुराईयाँ कै प्रति भावनारहित बणावै सै।, अर ; अर खमधआळो, नयखमधरण , , करो; ूँीं इब िा।

6 ो, िििाँ िहमलकरयै, कतवर ै, अर उसकणस अनगिणत ै; उसकाँिै, अर रणिैं। 7 उसनखलतीं उजिा, अर ीं रयै; उसनउसकउस ीं ििै, अर उसकिाँ िलण ैं।

8 ितरिां जन्‍अपणघरआळतर कमर ाँिकरै, उसतरिां थम िकरो। 9 यहभवन अन्‍नबलि अर अरआवै। उसकजक ैं, िकर रहैं। 10 गई, धरतिकरै; ूँअन्‍ा, नयखमधा, ै।

11 िों, शरिो, िो, कणक अर तर , करो; ूँगई 12 खगी, अर दरखत हळअन, खज, , बलके, दरखत खगैं; अर णस रहै।

13 जकों, कमर ाँधकट-पटक! ों, , , करो। परमसवर ों, आओ, ओढ़े ि! ूँपरमसवर भवन अन्‍नबलि अर अरइब आने।

14 उपविठहर, महसभरचकरो। रनिां ीं, बलकरहण आळयां अपणपरमसवर यहभवन कठकरकउसको।

15 उस िरण ! ूँयहिै। सरवशकिऔर सतिआवा। 16 खद? परमसवर भवन आननअर मगन रहया?

17 डळयाँ ्‍ळस गये, भण्‍पड़े ैं; खतिपड़े ैं, ूँगई18 पशितरिां करहवैं ै? ां-बळध ै, ूँउनकतर चररही; अर ़-बकरफळ रहै।

19 यहा, ूं, ूँगळ चरईयाँ आग ि1:19 जंगळ की चराईयाँ आग का निवाळा होगी टिड्डियाँ कै जरिये दरखतां की हालत इसी हो जावै सै जिस तरियां आग तै जळगी हो, सूरज की गर्मी अर पूर्व की हवा हरियाली नै इसी जळा देवै सै जिस तरियां के वो वास्तव म्ह आग कै धोरै आगी हो।, अर दरखत जळगे। 20 गळी-नवर तर ाँफदरहवै, ूँखगे, अर गळ चरईयाँ आग िी।

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