5 फेर मल्लाह माणस डरकै अपणे-अपणे देवता की दुहाई देण लाग्गे; अर1:5 अर फेर मल्लाह माणस डरकै अपणे-अपणे देवता की दुहाई देण लाग्गे; उननै वो सब कुछ करया जो वो कर सकैं थे। वे सच नै न्ही जाणै थे लेकिन वे इन्तजाम नै तो जाणै थे अर धार्मिक मूल म्ह भी उननै एक श्रद्धा के पात्र का बोध था। जहाज म्ह जो व्यापार का सामान था उसनै समुन्दर म्ह फैंकण लाग्गे के जहाज हळका हो जावै। पर योना जहाज के निचले हिस्से म्ह उतरकै ओड़ै लौटकै सो ग्या, अर गहरी नींद म्ह पड़या होया था। 6 फेर माँझी उसके धोरै आकै कहण लाग्या, "तू भारी नींद म्ह पड़या होया के करै सै? उठ, अपणे देवता की दुहाई दे! हो सकै सै के परमेसवर म्हारी चिंता करै, अर म्हारा नाश ना हो।"