4 थम मेरै म्ह बणे रहो, अर मै थारे म्ह, जिस तरियां डाळी जै अंगूर की बेल म्ह बणी न्ही रहवै तो खुद तै कोनी फळ सकदी, उस्से तरियां थम भी जै मेरै म्ह बणे न्ही रहो तो कोनी फळ सकदे।"
5 मै अंगूर की बेल की ढाळ सूं अर थम डाळी सो। जो मेरै म्ह बण्या रहवै सै अर मै उस म्ह, वो घणाए फळ फळै सै, क्यूँके मेरै तै न्यारे पाटकै थम कुछ न्ही कर सकदे।