1 जो बात यहोवा कहवै सै, उसनै सुणो उठकै, पहाड़ां कै स्याम्ही वाद-विवाद कर, अर टील्ले भी तेरी सुणण पावैं। 2 हे पहाड़ो, अर हे धरती की अटल नींव, यहोवा का वाद-विवाद सुणो, क्यूँके यहोवा का अपणी प्रजा कै गैल मुकद्दमा सै, अर वो इस्राएल तै वाद-विवाद करै सै।
3 "हे मेरी प्रजा, मन्नै तेरा के बिगाड़या सै? के करकै मन्नै तेरे ताहीं थका दिया सै? 4 मेरै खिलाफ गवाही दे! मै तो तेरे ताहीं मिस्र देश तै लिकाड़ ले आया, अर गुलाम्मी के घर तै मै तेरे ताहीं छुड़ा ल्याया; अर तेरी अगुवाई करण नै मूसा, हारुन अर मरियम ताहीं भेज दिया। 5 हे मेरी प्रजा, याद कर, के मोआब के राजा बालाक नै तेरै खिलाफ कौण सी योजना बणाई? अर बोर के बेट्टे बिलाम नै उस ताहीं के सलाह दी? अर शित्तीम तै गिलगाल ताहीं की बात्तां नै याद कर, जिसतै तू यहोवा के धार्मिकता के काम समझ सके।"
6 "मै के लेकै यहोवा कै स्याम्ही आऊँ, अर उप्पर रहण आळे परमेसवर कै स्याम्ही झुकूँ? के मै होमबलि कै खात्तर एक-एक साल के बाछड़े लेकै उसकै स्याम्ही आऊँ? 7 के यहोवा हजारों मिंढयाँ तै, या जैतून के तेल की लाखां नदियाँ तै खुश होवैगा? के मै अपणे अपराध के प्रायश्चित म्ह अपणे जेठ्ठे नै या अपणे पाप के बदले म्ह अपणे जन्माए होए किसे नै देऊँ?" 8 हे माणस, वो तेरे ताहीं बता चुक्या सै के आच्छा के सै; अर यहोवा तेरै तै इस्से नै छोड़ और के चाहवै सै, के तू न्याय तै काम करै, अर कृपा तै प्यार राक्खै, अर अपणे परमेसवर कै गैल नम्रता तै चाल्लै?
9 यहोवा की वाणी इस नगर नै पुकार रही सै, अर सारा ज्ञान, तेरे नाम का भय मानणा सै: राजदण्ड की, अर जो उसनै देण आळा सै उसकी बात सुणो! 10 के इब ताहीं दुष्ट के घर म्ह बुराई तै पाया होया धन अर छोट्टा एपा घृणित न्ही सै? 11 के मै कपट का तराजू अर बाध घाट के बाटां की थैल्ली लेकै पवित्र ठहर सकूँ सूं? 12 उरै के अमीर माणस उड़दंग का काम देख्या करै सैं; अर उरै के सारे रहण आळे झूठ बोल्लै सैं अर उनके मुँह तै छळ की बात लिकड़ै सैं। 13 इस कारण मै तेरे ताहीं मारदे-मारदे घणाए घायल करुँ सूं, अर तेरे पापां कै कारण तेरे ताहीं उजाड़ देऊँ सूं। 14 तू खावैगा, पर छिकण न्ही पावैगा, तेरा पेट जळदा ए रहवैगा; अर तू अपणी जायदाद लेकै चाल्लैगा, पर बचा ना सकैगा, अर जै कुछ तू बचा भी ले, उसनै मै तलवार चलाकै लुटवा दियुँगा। 15 तू बोवैगा, पर काटण न्ही पावैगा; तू जैतून का तेल लिकाड़ैगा, पर लगाण न्ही पावैगा; अर दाख रौंदैगा, पर दाखमधु पीण न्ही पावैगा। 16 क्यूँके वे राजा ओम्री अर उसके बेट्टे अहाब की सारी विधियाँ, अहाब के घरान्ने के सारे काम्मां पै चाल्लै सैं; अर थम उनकी योजना कै मुताबिक चाल्लो सो; इस करकै मै तेरे ताहीं उजाड़ दियुँगा, अर इस नगर के रहण आळयां पै ताळी बजवाऊँगा, अर थम मेरी प्रजा की बदनाम्मी सहोगे।