जागदे रहो
34 "इस करकै चौकन्ने रहियो, इसा ना हो के थारा मन खुमार, अर मतवालेपण, अर इस जिन्दगी की फिक्र तै सुस्त हो जावै, अर वो दिन थारे पै फन्दे की ढाळ चाणचक आण पड़ै। 35 क्यूँके वो सारी धरती के सारे बासिन्दा पै इस तरियां आण पड़ैगा। 36 इस करकै जागदे रहो अर हर बखत प्रार्थना करदे रहो के थम इन सारी आण आळी घटनायां तै बचण अर माणस के बेट्टे कै स्याम्ही खड़े होण कै जोग्गे बण सको।"