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मत्ती 14

लण

22 उसनिअपणां ीं िचढतर मजबकरयउसतहलचलै, िीं अपणणसां ीं िकरै। 23 णसां ीं िकरकै, थनकरण तर उनतअलग पहचलगया; अर ाँीं ओड़ै एका। 24 तब तक िसमदर िअर ्‍ां थप़े डगमगगरी, ूँहवी।

25 सबबजै-समदर उनकआया। 26 ्‍ें उस ीं समदर खकघबरे। अर ्‍े, "ै!" अर भय िरण े।

27 िउनतकरअर ा, "सलो! ूं, डरमतना!"

28 पतरस उसतजविा, "रभु, ै, मन्‍अपणलकआण कम े।"

29 ा, "!" पतरस िउतरकीं ्‍लण ा।

30 पर हवखकडरगा, अर िबण िरका, "रभु, मन्‍बचा!"

31 िबढ़ािअर उसता, "अलपबिी, तन्‍ांशक करया?"

32 ििचढे, हवथमगी। 33 इस घटनखकउसकां िे, उसकबड़ाकरककहा, "्‍चए, परमसवर ै।"

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