Pular para o conteúdo
Publicidade

मत्ती 25

दस िउदरण

1 आपणा, "ूं आऊणा, वऱििदस िसहि़ा ऊणा, आपणिां मशलय़े िलणिकल़िा। 2 िाँऔर ाँसमजदिा। 3 ििआपणिां मशलईया, पर आपलति लया। 4 पर समजदआपणिां मशआपणिां िपरा। 5 ़े आऊणऊईगी, िींटमकलगणलगऔर सयिा।

6 "आदिआला-लगऊणि ो, ़ा आऊणलगा, िलणचलो। 7 सब िउठिऔर आपणी-आपणमशकरनलगिा। 8 िसमजदलगिलणे, आपणआस़ा ो, कऊि आसमशिजणलगिा।’ 9 पर समजदा, आसऔर ि ऊणा। खरि और चण़ेखरआओ10 जदखरदणगईया, तद़ा आईगऔर िा, कअरचलिऔर करा। 11 िििआय़े लणलगिा, लक, लक, आसदरवो।’ 12 ििा, आऊसचलगलणि आऊि णदा।’ 13 इजतर गदरओ, कऊि आऊणिऔर कअड़िे।

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.

Veja também