4 परम दमधरे, ने कीर्पाळु छे; परम डाहवाय नी करे; परम आपणी बड़ाय नी करे, ने मटकाळु नी हय, 5 चु गलत रीत सी नी चाले, चु आपणी भलाय नी चाहावे, झुंझलावे नी, बुरो नी माने। 6 पाप सी खुसी नी हवे, बाकुन छाचाय सी खुसी हवे। 7 चु आखी वात सेण कर लेय, आखी वातेन भुरसु करे, आखी वातेन आस राखे, आखी वात मां दमधरे।
8 परम कदी टळे नी; भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात हवसे, ती खत्तम हय जासे; बुली हसे, ती जाती रवसे; अक्कल हसे, ची सर जासे