3 पेहल गुयो जाणी लेवु, की आकरी दाहड़ा मां हासी उड़ावणे वाळा आवसे, जे आपणी लालुचेन अनसारे चालसे। 4 ने कवसे, "हीनाक आवणेन वायदु काहा गुय? काहाकी जत्यार सी डाहा बुड़ा सुय गुयला छे, आखा काय असात छे, जसों कळीन सुरु सी हतलो?" 5 चे ते जाणी बुजीन ज्य वीसरी गुया, की भगवानेन बुलेन साहरे सरग काय दाहड़ा सी पेहल सी हतलो, छे ने धरती बी पाणी मां सी बणी ने पाणी मां टेकली छे।3:5 उबजाणनी किताप 1:6-9 6 ज्य हीनु हासी उडाड़न्यान वजे सी हीनी टेम मां कळी पाणी मां डुबीन सरी गुय।3:6 उबजाणनी किताप 7:11-21 7 बाकुन हयन टेमेन सरग ने धरती हया बुलेन साहरे हेरेसी मेकी गुयली छे, की धपाड़ी जाय, ने जे पापी माणसेन नीयाव ने खत्तम हवणेन दाहड़ा लग असुत राखी रवसे।