51 ए काठला, ने मन ने कान्टान नी फतरी काटाड़ला माणसे! तुहुंं जलम चुखली-आत्मान वीरुद कर्या करे। तुहुंं तुंद्रा आड़ा-बुड़ान तसा छे।
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51 ए काठला, ने मन ने कान्टान नी फतरी काटाड़ला माणसे! तुहुंं जलम चुखली-आत्मान वीरुद कर्या करे। तुहुंं तुंद्रा आड़ा-बुड़ान तसा छे।