44 ईसु तीनुक अळी कह्यु, "मारी जी वात, ची वात छे, जी मे तुहुंंक सुरु सी कवतु आय रयु, की मुसान साहरे लिखली सास्तुर वाळी वात ने भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात बताड़ने वाळा माणसेन वात, ने भजन मां लिखली वात पुरी हवणेन हतली, जी मारा बारामां लिखली छे।"
44 ईसु तीनुक अळी कह्यु, "मारी जी वात, ची वात छे, जी मे तुहुंंक सुरु सी कवतु आय रयु, की मुसान साहरे लिखली सास्तुर वाळी वात ने भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात बताड़ने वाळा माणसेन वात, ने भजन मां लिखली वात पुरी हवणेन हतली, जी मारा बारामां लिखली छे।"