36 तत्यार चु टुळा काजे छुड़ दीन घर मां आयु, ने तेरा चेला तेरे धड़े आवीन कह्या, "खेतेन जळ-गहुंन दाखलान मतलब काय हवे चो हामुक समजाड़ी दे।"
37 ईसु तीनुक जपाप आप्यु, "वारलु बीज एरने वाळु किरसाण, माणसेन पुर्यु छे।" 38 ने खेत जी कळी छे, वारलु बीज भगवानेन राजेन माणसे छे, ने जळ-गहुंन बीज कुहर्या वेरीन माणसे छे। 39 चु वेरी जळ-गहुं एर्यु चु भुतड़ु छे; काटणी कळी मां खत्तम हवणी छे, ने काटण्यु सरग वाळा काहवाळ्या छे। 40 जसा माणसे जळ-गहुं भेळा करीन धपाड़ी देय, तसीत जी कळी खत्तम मां हवसे। 41 माणसेन पुर्यु तेरा सरग वाळा काहवाळ्या काजे मकलसे, ने चे तींद्रा राज मां सी आखा पाप करने वाळा काजे भगवानेन राजेम सी अलग करीन तीनुक भेळा करसे। 42 ने तीनुक आकठान डहरा धकली देसे, चे माणसे आकठी मां बेसका रड़से ने दात ककड़ावता रवसे। 43 तीनी टेमे वारलु माणसे आपणा बासेन राज मां दाहड़ान तसा चमकसे। जतरा बी सामळी रया, चे वारु सामळीन समजणु चाहजे।