14 तुहुंं ज नी जाणु की वाहणे काय हवसे। तुंद्री जीवाय्न काय ठीकाणो नी हय। तुंद्री जीवाय ते कुळ्ळा साय छे, जी थुड़ीक वार देखाव पड़े ने अंछाप हय जाय।4:14 नीतीवचन 27:1 15 हेरेसी तुहुंंक असो कहंणु चाहजे की कदी भगवान मालीकेन मरजी हसे, ती वाहणे बी जीवतेलो रवसु ने ज काम नी ते पलो काम करसु।