20 तुम्हर तो ऊ पवितर मनसे के पल्ला लग अभिसेक होय हबै, अउ तुम सगलू सत्य के जानथा।
27 जउन अभिसेक तुम मनसे मसीह लग पाय हबा, ऊ तुम्हर हे मवजूद रथै, इहैनिता तुमही जरूरत नेहको कि कउनो मनसे सिखामै, मसीह लग मिले हर अभिसेक तुमही सगलू कुछ सिखाथै, ओखर सिक्छा सत्य हबै असत्य नेहको ऊ सिक्छा के जसना तुम मसीह हे बने रहा।