मंडली हे अध्यक्छ
1 हइ बात सत्य हबै कि अगर कउ मुखिया बनै चाहथै, ता ऊ अक्ठी निक्खा काम के इक्छा रखथै। 2 बिस्वास के भेद जउन परगट करे गय हबै, कि मुखिया निरदोस, अउ अक्ठिन डउकी के डउका अउ संयमी, सुसील, निक्खा मनसे, पहुनाई करै बाले अउ सिखामै हे निपुड होय। 3 दरुहा या झगडा करै बाले झइ होय पय कोमर होय, अउ न झगडा करे बाले अउ न डेरा के लालची होय। 4 अपन परवार के ऊ निक्खा परबन्धक होय अउ ओखर लरका ओखर कब्जा हे रहै, अउ ओखर पूर इज्जत करै। 5 अगर कउ अपन घर के परबन्धक नेहको के सकथै, ता ऊ भगवान के मंडली के देखरेख कइसन के सकही? 6 ऊ अक्ठी नबा चेला झइ होय चाही, ताकि ऊ घमंड लग भर झइ जाय, अउ उके भुतवा के जसना सजा के भागी झइ हुइ जाय। 7 इहो जरूरी हबै कि मंडली के बाहिर ऊ ईज्जत के काबिल होय कि ऊ बदनामी अउ भुतवा के फान्दा हे झइ पड जाय।