51 स्तिफनुस आगू बोलतेन रहिस केतका तुम ढीठ हबा, मन अउ कान लग बिना सुध्दिकरन के हबा तुम अपन सियानन के जसना हबा, तुम सबदिना पवितर आतमा के बिरोध करे हबा।
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51 स्तिफनुस आगू बोलतेन रहिस केतका तुम ढीठ हबा, मन अउ कान लग बिना सुध्दिकरन के हबा तुम अपन सियानन के जसना हबा, तुम सबदिना पवितर आतमा के बिरोध करे हबा।
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