32 कुछ रोज के बाद सुरता करा जब तुम उजेड पाय रहा अउ ओखर बाद जब तुम दुख भोगत बोहत संघर्स करके सामना करत मजबूत बने रइहा। 33 कबहुन तो सब मनसेन के आगू तुमही बेज्जती अउ अतियाचार सहै के पडिस अउ कुछ झन के असना संकट हे पडे हरन के सहभागी बनै के पडिस। 34 अपन जेलियर मनसेन के संग दुख हे उनखर दुख बांटा अउ जब तुम्हर डेरा जइजात के छंडाय लइन, ता अपने-अपन हे जउन नुसकान हुइस उके खुसी-खुसी सुइकार लइन, काखे उन जानथै कि हमर लिघ्घो अभिन्नो कुछ डेरा जइजात हबै जउन सबरोज रही।
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