राई बिजहा कर किस्सा
31 यीसु उनखर आगू अक्ठी अउ किस्सा कथै, कि "स्वरग कर राज राई के दाना कर जसना हबै, जेही कोनो मनसे लइके अपन खेत हे बोय दय हबै। 32 राई बिजहा सगलू बिजहा लग नान तो हबै, पय बढके सगलू सबजी भाजिन लग बड्डे हुइ जथै, अउ असना रूख बनथै, कि बादर के चिरइया आयके ओखर डगइल हे सोथै।"